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हाईकोर्ट का निर्देश: सीमा भूमि BSF को सौंपे ममता सरकार, घुसपैठ पर कसेगा शिकंजा

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High Court directs Mamata Banerjee government to hand over border land to BSF, crackdown on infiltration

कलकत्ता: कलकत्ता उच्च न्यायालय के हालिया आदेश ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद को एक निर्णायक मोड़ दे दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार की निधि से खरीदी गई समस्त सीमा भूमि 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी जाए। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने पारित किया।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा वर्षों से राजनीति का अखाड़ा बना रहा है। तृणमूल कांग्रेस का कहना रहा है कि सीमा सुरक्षा BSF की जिम्मेदारी है, जो केंद्र के अधीन है, जबकि भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार जानबूझकर बाड़बंदी के लिए आवश्यक भूमि सौंपने में देरी करती रही है। अदालत के इस फैसले ने इन आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की कोशिश की है।

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यह मामला एक पूर्व सेना उप प्रमुख द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। याचिका में बताया गया कि पश्चिम बंगाल से लगी 2216.70 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा देश की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो नौ जिलों से होकर गुजरती है। कई इलाकों में अब भी बाड़बंदी अधूरी है, जिससे अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध बढ़े हैं। अदालत के समक्ष रखे गए आंकड़ों में 2023 से 2025 के बीच घुसपैठ के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि सामने आई।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि भूमि का शीघ्र हस्तांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। अदालत ने भी माना कि सीमा बाड़बंदी राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि जिन इलाकों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा पूरा हो चुका है, वहां भी BSF को जमीन नहीं सौंपी गई।

इस आदेश को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। भाजपा ने इसे अपनी वर्षों पुरानी मांग की जीत बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र पर पलटवार किया है। कुल मिलाकर, अदालत का यह फैसला संकेत देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अब देरी और राजनीतिक टालमटोल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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