नयी दिल्ली: महाराष्ट्र के बारामती में हुआ विमान हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना भर नहीं रह गया है, बल्कि इसने देश की विमानन सुरक्षा व्यवस्था और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस बारामती की धरती से अजित पवार ने राजनीति की ऊंचाइयों तक का सफर तय किया, वही शहर उनके जीवन की अंतिम यात्रा का साक्षी बन गया। यह हादसा भावनात्मक रूप से जितना दुखद है, उतना ही चिंताजनक भी।
जानकारी के अनुसार, हादसे का शिकार हुआ विमान लियरजेट 45 एक्सआर था, जो वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में था। यह कंपनी नॉन-शेड्यूल विमान संचालन के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले ढाई वर्षों में महाराष्ट्र में इसी कंपनी के विमान से जुड़ी यह दूसरी बड़ी दुर्घटना है। सितंबर 2023 में मुंबई में इसी मॉडल का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सौभाग्य से कोई जान नहीं गई थी। उस हादसे में तकनीकी चेतावनियों, ऑटो पायलट फेल होने और खराब मौसम की बात सामने आई थी।
इस बार हादसा जानलेवा साबित हुआ और पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए, वहीं राज्य सरकार ने तत्काल सार्वजनिक अवकाश और तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने इस घटना को और संवेदनशील बना दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हादसे पर साजिश की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि लियरजेट 45 एक्सआर एक आधुनिक और विश्वसनीय विमान माना जाता है, लेकिन बार-बार एक ही कंपनी और मॉडल से जुड़ी घटनाएं लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। यह हादसा न सिर्फ एक बड़े नेता की असामयिक मृत्यु है, बल्कि सिस्टम की खामियों का आईना भी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घटना से सबक लिया जाएगा या यह भी जांच फाइलों में दबकर रह जाएगी। पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही इन सवालों का जवाब दे सकती है।







