नयी दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चागोस द्वीप समूह को लेकर की गई टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और इसके असर भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकते हैं। ट्रंप ने ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के फैसले को “बहुत बड़ी मूर्खता” बताया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत लंबे समय से मॉरीशस के चागोस पर संप्रभुता के दावे का समर्थन करता रहा है।
गौरतलब है कि मई 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपा जाना तय हुआ। हालांकि, डिएगो गार्सिया द्वीप पर मौजूद अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डे को लेकर ब्रिटेन को 99 वर्षों के लिए लीज पर रखने की अनुमति दी गई है, जिसके बदले हर साल 100 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि दी जाएगी। पहले अमेरिका ने इस समझौते का समर्थन किया था, लेकिन ट्रंप की ताजा टिप्पणी ने अमेरिकी रुख को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बयान का असर ब्रिटेन की आंतरिक राजनीति में भी दिख रहा है। ब्रिटिश सरकार ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चागोस संधि पर होने वाली बहस को फिलहाल रोक दिया है। वहीं भारत के लिए यह मुद्दा रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों रूप से अहम माना जा रहा है। चागोस द्वीप समूह के मॉरीशस में शामिल होने से उसका विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) काफी बढ़ जाएगा, जिसमें भारत पहले से ही सर्वेक्षण और निगरानी में सहयोग कर रहा है।
भारत-मॉरीशस के बीच मजबूत रक्षा और समुद्री सहयोग है। भारत न केवल मॉरीशस के EEZ में हाइड्रोग्राफिक सर्वे में मदद कर रहा है, बल्कि पोर्ट लुई के पुनर्विकास और समुद्री सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।
ऐतिहासिक रूप से चागोस द्वीप समूह मॉरीशस का हिस्सा रहे हैं, जिन्हें 1965 में ब्रिटेन ने अलग कर लिया था। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने ब्रिटेन के नियंत्रण को अवैध बताया था। ऐसे में ट्रंप की टिप्पणी न केवल इस कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में संभावित कूटनीतिक तनाव का संकेत भी देती है।







