नयी दिल्ली: भारतीय रुपये पर बुधवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और डॉलर की मजबूत मांग के बीच शुरुआती कारोबार में रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.28 प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया। यह अब तक का सर्वकालिक निचला स्तर है। मंगलवार को रुपया 7 पैसे टूटकर 90.97 पर बंद हुआ था, लेकिन बुधवार को गिरावट और तेज हो गई।
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति को लेकर बयानबाजी और निवेशकों के बढ़ते जोखिम-परहेज रुख ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी का असर भारतीय रुपये पर भी साफ दिख रहा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.05 पर खुला और कारोबार के दौरान 91.28 तक कमजोर हो गया।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार युद्ध की बयानबाजी को फिर से हवा देना और ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए विस्तारवादी संकेतों ने बाजार की अस्थिरता बढ़ा दी है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे डॉलर में मजबूती बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर झुक रहे हैं, जिसका सीधा असर रुपये जैसी मुद्राओं पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया 91.07 के ऊपर कमजोर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में यह 91.70 से 92.00 के दायरे की ओर बढ़ सकता है, जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप नहीं करता। वहीं, किसी भी सुधार की स्थिति में 90.30 से 90.50 का स्तर रुपये के लिए अहम समर्थन बन सकता है।
इस बीच, घरेलू शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 386 अंक गिरकर 81,794 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 91 अंक फिसलकर 25,141 पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और वैश्विक संकेतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। कुल मिलाकर, कमजोर रुपये ने अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।







