मुजफ्फरपुर: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय: हर घर नल-जल’ के तहत मुजफ्फरपुर के खबरा पंचायत वार्ड संख्या 4 में एक अनोखी लापरवाही सामने आई है। पीएचईडी विभाग और तत्कालीन पंचायत प्रतिनिधियों ने शमशान घाट के भीतर पानी की टंकी का निर्माण किया, जिससे आसपास के लगभग 2000 लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। टंकी से घरों तक पानी तो पहुंच रहा है, लेकिन धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के कारण ग्रामीण इस पानी का इस्तेमाल पीने या खाना बनाने में नहीं कर पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शमशान घाट जैसी जगह से पानी का लेना धार्मिक और मानसिक दृष्टि से अस्वीकार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वार्ड में सार्वजनिक और सरकारी भूमि उपलब्ध थी, तो शमशान घाट जैसी संवेदनशील जगह पर टंकी क्यों बनाई गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि टंकी को किसी और स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
वार्ड सचिव पप्पू दास ने बताया कि इस योजना के लिए 26 लाख रुपए आवंटित किए गए थे और निर्माण के समय ग्रामीणों ने विरोध जताया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। स्थानीय मुखिया प्रियम प्रिय और प्रतिनिधि पंकज कुमार ओझा ने बताया कि सैकड़ों परिवार पीने के पानी के लिए परेशान हैं। वार्ड पार्षद अनीता देवी और सुशील कुमार का कहना है कि पीएचईडी विभाग इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा।
ग्रामीणों ने विधायक बेबी कुमारी से शिकायत की। उन्होंने कहा कि शमशान घाट जैसे संवेदनशील स्थल पर टंकी बनाना गंभीर आपत्तिजनक है। बेबी कुमारी ने आश्वासन दिया कि वह पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह को इस मामले की जानकारी देंगी और पूरी तरह जांच कराई जाएगी।
यह मामला दिखाता है कि सरकारी योजनाओं में स्थानीय संवेदनाओं और लोगों की राय को नजरअंदाज करने से गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से नल-जल का उपयोग करना चाहते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य और धार्मिक भावना दोनों सुरक्षित रहें।







