मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में शुक्रवार को भारतीय रुपया भारी दबाव में रहा और कारोबार की समाप्ति पर यह 44.75 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 90.7875 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह रुपये की लगातार तीसरी कारोबारी सत्र में गिरावट है। इससे पहले 14 जनवरी को रुपया 11 पैसे टूटकर 90.34 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बीते तीन कारोबारी दिनों में भारतीय मुद्रा कुल 61.25 पैसे लुढ़क चुकी है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है।
कारोबार की शुरुआत से ही रुपये पर दबाव देखने को मिला। यह 3.50 पैसे की गिरावट के साथ 90.3750 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती घंटों में सीमित दायरे में कारोबार के बाद जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, रुपये की कमजोरी और गहराती चली गई। एक समय यह 90.89 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो हालिया सत्रों में इसकी सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा भारतीय पूंजी बाजार से लगातार पूंजी निकासी रुपये पर दबाव का प्रमुख कारण रही।
वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर असर डाला है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक कारकों ने भी रुपये की चाल को प्रभावित किया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि एफआईआई की बिकवाली का सिलसिला जारी रहता है और डॉलर में मजबूती बनी रहती है, तो रुपया निकट भविष्य में 91 रुपये प्रति डॉलर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित दखल और घरेलू आर्थिक संकेतक रुपये को कुछ हद तक सहारा दे सकते हैं। बाजार की नजर अब आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के रुख पर टिकी हुई है।







