पटना: बिहार की सड़कों अब विदेश जैसी बनाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। प्रदेश के पथ निर्माण और उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने ऐलान किया है कि बिहार में अब मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पांच नए एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे। ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को पूरा करने के लिए विभाग ने मास्टर रोड मैप पर काम शुरू कर दिया है। इनके बन जाने पर राज्य के किसी भी कोने में पांच घंटे के भीतर पटना पहुंचा जा सकेगा।
अब सवाल उठता है कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे मॉडल क्या है, जिसके आधार पर बिहार में एक्सप्रेस-वे बनेगा? मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे देश का पहला सिक्स लेन हाई स्पीड कॉरिडोर है, जिसका निर्माण BOT (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के तहत किया गया था। 95 किलोमीटर लंबी इस सड़क का श्रेय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को जाता है। 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका उद्घाटन किया था। इसी सफल मॉडल को अब बिहार की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए अपनाया जाएगा।
यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का एक हिस्सा है। इसमें सड़क बनाने वाली निजी कंपनी खुद बैंक से लोन लेकर और पूंजी लगाकर निर्माण करती है। इस योजना में सरकार को निर्माण में बहुत कम राशि देनी होती है। एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी एक निश्चित समय तक टोल वसूलकर अपनी लागत और मुनाफा निकालती है। इस दौरान सड़क के संचालन और मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की ही होती है। जब कंपनी एक्सप्रेस-वे बनाने में लगी अपनी लागत वसूल लेती है तो तय समय सीमा के अनुसार एक्सप्रेस-वे को सरकार के हवाले कर दिया जाता है। फिर सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है।







