
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव गायब हो गए थे। लेकिन इन दिनों तेज प्रताप यादव एक बार फिर बहुत ज्यादा एक्टिव हो गए हैं। मकर संक्रांति से पहले तेज प्रताप यादव घर-घर जाकर एनडीए के मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें अपने यहां दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दे रहे हैं। तेज प्रताप का यूं अचानक से एक्टिव होने से कई सवाल खड़े होने लगे हैं। क्या लालू यादव की विरासत को तेज प्रताप यादव संभालना चाहते हैं? क्या मकर संक्राति के बाद बिहार में कोई नया ‘खेला’ दिखाई देगा? दरअसल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव का बीते महीने दिल्ली में आंखों की सर्जरी हुई थी। सर्जरी के बाद से ही लालू यादव दिल्ली में है। वहीं तेजस्वी यादव भी अभी पटना से बाहर हैं। ऐसे में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अचानक बिहार की राजनीति में ‘बहुत ज़्यादा एक्टिव’ हो गए हैं।
उन्होंने अपने घर पर ‘दही-चूड़ा’ भोज के लिए कई NDA मंत्रियों को पर्सनली न्योता दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि यह भोज 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित किया जाएगा। तेज प्रताप यादव ने बीते तीन दिन के अंदर बिहार सरकार के कई मंत्रियों से मुलाकात की और उन्हें अपने घर पर दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया। तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (RLM) के घर जाकर न्योता दिया। इसके बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री और राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा (BJP), लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन (HAM-S) और BJP के बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात की। तेज प्रताप यादव के परिवार और राजद से तनाव पूर्ण रिश्ते को देखते हुए यूं एनडीए के मंत्रियों के घर जाता देख बिहार में राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि तेज प्रताप ने इस कार्यक्रम को पूरी तरह से ‘सामाजिक और सांस्कृतिक’ बताया, लेकिन BJP और NDA नेताओं के साथ उनकी बढ़ती बातचीत ने बिहार में संभावित राजनीतिक बदलावों के बारे में नई चर्चा शुरू कर दी है। बता दें, अनुष्का यादव के साथ तेज प्रताप की तस्वीरें सामने आने के बाद लालू यादव ने उन्हें परिवार से बेदखल कर दिया था।
साथ ही RJD से भी उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। दिल्ली पहुंचे तेज प्रताप यादव ने कहा कि वो दही-चूड़ा भोज के लिए सभी से मुलाकात कर रहे हैं और न्योता भेज रहे हैं। यहां हम एक मामले की सुनवाई के लिए आए थे। बिहार में गिरते पारे के बीच तेज प्रताप ने सियासत में गरमागरम बहस छेड़ दी है। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाला दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आगे की रणनीति का राजनीतिक मंच भी रहा है। लालू यादव ने सत्ता में रहते हुए दही-चूड़ा भोज की परंपरा को राजनीतिक कार्यक्रम का रूप दिया था। बीते कुछ सालों को देखें तो बिहार में सत्ता परिवर्तन दही चूड़ा भोज के बाद ही हुई है। इसके संकेत भी दही-चूड़ा भोज में मिलते रहे हैं। हालांकि तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज किया। नीरज कुमार ने कहा कि लालू यादव और तेजस्वी नहीं है। ऐसे में तेज प्रताप इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘हम सुझाव देते हैं कि तेज प्रताप यह दावत अपने महुआबाग या कौटिल्य नगर वाले घर पर दें, क्योंकि उनका असर और जितने समर्थक इकट्ठा हो सकते हैं, उसे देखते हुए। सरकारी घर दावत के लिए शायद बहुत छोटा पड़ जाए।’






