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श्रीराम–सीता के प्रथम विश्राम स्थल को संवारने की तैयारी, धार्मिक धाम होगा विकसित

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Preparations underway to beautify the first resting place of Shri Ram and Sita, a religious shrine to be developed

मोतिहारी: त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं माता सीता के परिणय संस्कार के उपरांत बारात ठहरने वाले स्थल मोतिहारी के सीताकुंड धाम के विकास को लेकर बिहार सरकार सजग है। माता जानकी की जन्मस्थली पुनौरा धाम की तर्ज पर इस क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि अब इस स्थल की पहचान पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होगी। पूर्वी चंपारण जिले के पीपरा थाना अंतर्गत बेदीवन मधुबन पंचायत में स्थित ऐतिहासिक सीताकुंड धाम के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसका विकास किया जा रहा है। इस परियोजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।

कार्य की शुरुआत पिछले वर्ष सितंबर माह में हुई है तथा इस वर्ष दिसंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। निगम के जीएम चंदन चौहान ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत परिसर की चारदीवारी, प्रवेश द्वार, सुरक्षा व्यवस्था, तालाब का सौंदर्यीकरण, सड़क और बैठने की सुविधा, कैफेटेरिया, कॉटेज, शौचालय परिसर तथा दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 15 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पूर्ण होने से सीताकुंड धाम एक आधुनिक, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित तीर्थ एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। सीताकुंड धाम मोतिहारी से 22 किलोमीटर दूर है।

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लगभग 12 फीट ऊंचे टीलानुमा स्थान पर करीब 20 एकड़ के विशाल भूखंड में फैला हुआ यह स्थल सीताकुंड के नाम से जाना जाता है। यहां एक बड़ा तालाब भी है। यहां के अवशेष, प्राचीन मूर्तियों सहित पवित्र कुंड इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। कहा जाता है कि त्रेता युग में जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की बारात अयोध्या से जनकपुर वापस लौट रही थी, उसी समय नवविवाहित श्रीराम-जानकी की जोड़ी यहां विश्राम के लिए रुकी थी। यहीं पर श्रीराम और सीता के कंगन को खोलने की रस्म भी पूरी हुई थी। इसे लोकभाषा में ‘चौठारी’ के नाम से जाना जाता है। यहां शिवालय, बाग-बगीचा एवं कई तालाबों का निर्माण भी हुआ था। आज भी सीताकुंड के आस-पास कई प्राचीन पोखर स्थित हैं।

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