
खगड़िया: आजादी के 78 साल बाद भी, कोसी नदी के किनारे बसे कई गांवों में स्कूली बच्चों को बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। खगड़िया जिले के चौथम ब्लॉक के रोहियार पंचायत के अंतर्गत आने वाले बंगलिया गांव में रहने वाले छात्रों के लिए, लंबी दूरी, असुरक्षित यात्रा और सरकारी उपेक्षा के कारण माध्यमिक शिक्षा पूरी करना आज भी एक संघर्ष है, जो उन्हें हर दिन करना पड़ता है। बंगलिया गांव में पर्याप्त भूमि के साथ चार सरकारी प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद, इस क्षेत्र में एक भी सरकारी मिडिल स्कूल विद्यालय नहीं है। नतीजा ये कि, प्राथमिक शिक्षा पूरी करने वाले बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए बल्कुंडा या रोहिआर जैसे पड़ोसी गांवों तक लगभग 5 से 6 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।
इस यात्रा में प्रतिदिन कोसी नदी को नाव से पार करना पड़ता है। बड़ी बात ये कि खराब या बारिश के मौसम में मासूम बच्चे जान हथेली पर रख कर स्कूल जाते हैं। लगभग 200 से 300 छात्र प्रतिदिन इस यात्रा को करते हैं, सुबह-सुबह घर से निकलते हैं और नाव से नदी पार करने के बाद ही लौट पाते हैं। खराब संपर्क और उचित परिवहन बुनियादी ढांचे के अभाव ने समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे नियमित उपस्थिति मुश्किल हो गई है। ऐसे में इनके स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ गया है, खासकर लड़कियों में। जिला शिक्षा अधिकारी अमरेंद्र कुमार गोंड ने स्वीकार किया कि प्रशासन को इस स्थिति की जानकारी है। गोंड ने कहा, ‘आगामी वित्तीय वर्ष में सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस मामले में आवश्यक कदम उठाने के लिए केंद्र सरकार के परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) से आग्रह किया जाएगा।’
स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता रतन सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्वाचित प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बार-बार प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्थानीय जेडीयू विधायक पन्नालाल सिंह पटेल को छात्रों की कठिनाइयों से अवगत कराया था। रतन सिंह ने कहा कि ‘विधायक जी ने मुझे आश्वासन दिया था कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’ लेकिन उन्होंने आगे कहा कि अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इस क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि माध्यमिक विद्यालय के अभाव ने उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के सपने पर ऐसी चोट मारी है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। कई लोगों को डर है कि इस तरह की लगातार उपेक्षा के कारण छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ सकते हैं, जिससे नदी किनारे बसे इन बस्तियों में अभाव की खाई और गहरी हो सकती है। जाहिर है कि सरकार को यहां भी ‘बिहार की रफ्तार’ दिखानी होगी।






