
पटना: राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वावलंबी होने की दिशा में कदम तो बहुत पहले ही बढ़ा दिए थे। इसके पहले कृषि रोड मैप के जरिए हरेक भारतीय की थाली में एक बिहारी व्यंजन का संकल्प आज भी जारी है। इस बार एक नया संकल्प राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिया है। यह दीगर है कि इस नए संकल्प की प्रेरणा उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ की एनडीए सरकार से मिली है। चलिए जानते हैं कि क्या क्या और किस रास्ते मुख्यमंत्री कुछ नया चुनौती स्वीकार करने जा रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नए संकल्प में शामिल है खुद के दम पर एक्सप्रेस-वे बनाना। बिहार सरकार ऐसा केंद्र पर निर्भरता कम करने के लिए कर रही है। बिहार सरकार भी उत्तर प्रदेश के मॉडल पर खुद के दम पर एक्सप्रेस-वे बनाएगी।
इसके लिए एक स्वतंत्र अथॉरिटी (प्राधिकरण) बनाया जायेगा। इस प्राधिकरण को पूरी ज़िम्मेदारी एक्सप्रेस-वे को सौंपी जाएगी। इसमें अर्थ प्रबन्धन से लेकर एक्सप्रेस-वे बनाने तक की जिम्मेदारी इस प्राधिकार को उठाना पड़ेगा। मिली जानकारी के अनुसार अपने से एक्सप्रेसवे बनाने के लिए अर्थ हेतु तमाम वित्तीय संस्थानों से लोन लिया जाएगा। इस लोन हेतु राज्य सरकार खुद गारंटर भी बनेंगी। इस योजना से राज्य में रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी। कई रूट पर तो एक्सप्रेसवे का काम 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। एक्सप्रेसवे को लेकर पहले ही तय कर चुकी है कि वो उत्तर प्रदेश के तर्ज पर काम करेगी। उत्तर प्रदेश के तर्ज पर ही कहां से पैसा आयेगा और आमदनी कैसे होगी पर बिहार सरकार अमल करने जा रही है। वित्तीय मदद तो सरकार वित्तीय संस्थानों से लोन लेगी।
सरकार सिर्फ गारंटर की भूमिका निभाएगी, जिससे लोन आसानी से मिल जाएगा। एक्सप्रेसवे बनने के बाद उस पर टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसी टोल से ली गई राशि की भरपाई होगी और सरकार पर सीधा बोझ नहीं पड़ेगा।रोजगार, निर्माण कार्य से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। यह उनके प्रतिदिन आमदनी में इजाफा करेगा। यह योजना बिहार को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आत्मनिर्भर बनाएगी और केंद्र की योजनाओं से अलग अपनी व्यवस्था के तहत काम करेगी। फिलहाल इससे पटना, पूर्णिया, रक्सौल जैसे शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी और व्यापार-उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। योगी आदित्यनाथ की एनडीए सरकार से मिली है। चलिए जानते हैं कि क्या क्या और किस रास्ते मुख्यमंत्री कुछ नया चुनौती स्वीकार करने जा रहे हैं।






