पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब छह लाख शिक्षकों को नए साल में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग शिक्षक स्थानांतरण नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेजी से जुटा हुआ है, जिसका लक्ष्य शिक्षकों की सुविधा और पारदर्शिता को बढ़ाना है। उम्मीद है कि यह नई नियमावली अगले एक महीने के अंदर राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दी जाएगी और इसके बाद इसे जल्द ही लागू किया जाएगा। यह नियमावली राज्य के लगभग 79 हजार स्कूलों में कार्यरत सभी तरह के शिक्षकों—पुराने शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय अध्यापक, प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षकों—के लिए एक समान होगी। पिछले कई सालों से शिक्षकों के तबादले के लिए कोई स्पष्ट और स्थायी नीति नहीं थी, जिससे शिक्षकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी और शिक्षा विभाग को अदालतों में भी कई मुकदमों का सामना करना पड़ रहा था।
2006 में नियोजित शिक्षकों की बहाली के बाद से यह समस्या लगातार बनी हुई थी। नई नियमावली लागू होने के बाद एक लाख से अधिक तबादला चाहने वाले शिक्षकों को लाभ मिलेगा। इससे तबादलों की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएगी, जिससे स्कूलों में शिक्षण का माहौल भी बेहतर होगा। विभाग ने पहले विधानसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन शिक्षक संघों की आपत्तियों के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। अब सभी आपत्तियों पर विचार किया जा रहा है। नई नियमावली में शिक्षकों की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद शिक्षकों को तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिससे उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह प्रक्रिया समय और श्रम दोनों की बचत करेगी। इसके अलावा, नियमावली में यह प्रावधान किया गया है कि नियुक्ति के पाँच साल तक शिक्षकों को तबादले का मौका नहीं मिलेगा।
हालांकि, गंभीर बीमारी या अन्य जरूरी कारणों के आधार पर पांच साल पूरा होने से पहले भी ऐच्छिक तबादला संभव हो सकेगा। यह नियम शिक्षकों को एक ही स्थान पर टिक कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। शिक्षा विभाग का यह कदम शिक्षकों की लंबित मांग को पूरा करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि एक पक्की नियमावली न होने के कारण तबादलों को लेकर मुकदमेबाजी हो रही थी और शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। इस नई नीति से तबादलों में पारदर्शिता आएगी, शिक्षकों को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था में निरंतरता बनी रहेगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह बिहार के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित होगा। राज्य में स्कूलों की कुल संख्या की बात करें, तो प्राथमिक विद्यालय 40 हजार 270 हैं। मध्य विद्यालय की संख्या 27 हजार 903 है। बुनियादी विद्यालय की संख्या 391 है।







