पटना: सम्राट चौधरी के बिहार के गृहमंत्री बनने के बाद एक कठोर शासन का संकेत तो मिला, लेकिन फिलहाल अपराध के आंकड़ों में कमी नहीं आयी है। गृह मंत्री ने अपराधियों को बिहार छोड़ने की जो चेतावनी दी थी, फिलहाल उसका असर नहीं दिख रहा है। उनके गृह मंत्री रहते पिछले दस दिनों में करीब 42 हत्या की वारदातें हो चुकी हैं। अपराध पर नियंत्रण, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार अपराधी गिरफ्तार होते हैं, लेकिन पुलिस के कमजोर अनुसंधान के कारण उन्हें बेल मिल जाती है और वे फिर जुर्म की दुनिया में दाखिल हो जाते हैं। इसलिए पुलिस मुस्तैदी से जांच करे और अदालत में ठोस सबूत पेश करे, ताकि अपराधी को सजा मिल सके। तभी अपराधियों में कानून का डर पैदा होगा। 2007 बैच के IAS संजय कुमार सिंह को गृह विभाग के ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) का अतिरक्त प्रभार दिया गया है। किसी भी विभाग में ओएसडी का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। गृह विभाग में तो और भी खास है। लेकिन इस महत्वपूर्ण पद को प्रभार में दिये जाने का मतलब है कि इस नियुक्ति के नतीजों का अभी आंकलन होगा। या फिर कुछ तात्कालिक लक्ष्य को जल्द पूरा करने के लिए यह नियुक्ति की गयी है।
आम तौर पर किसी विभाग में अधिकृत पदों पर बैठे अधिकारियों की रुटीन (नियमित) जिम्मेदारियां होतीं हैं। लेकिन जब सरकार को किसी विभाग में किसी विशेष कार्य को जमीन पर उतारना होता है तो वह उस विभाग में एक ओएसडी की नियुक्ति करती है। वह सिर्फ अपने प्रोजेक्ट पर फोकस्ड रहता है। ऐसे अधिकारी की नियुक्ति किसी खास मिशन के लिए होती है और उसका पूरा समय अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रहता है। उसका काम सामान्य अधिकारियों से अलग होता है। ओएसडी, मंत्री (सरकार) और सामान्य अधिकारियों के बीच सेतु का काम करता है। वह मंत्री या सरकार की प्राथमिकता को नियमित अधिकारियों तक पहुंचाता है। दोनों के बीच समन्वय स्थापित कर फैसले की गति को तेज करता है।सम्राट चौधरी को एक मिशन के तहत ही गृह विभाग सौंपा गया है। अपराध पर काबू पाना और राज्य में कानून का शासन कायम करना, फिलहाल ये दो बड़े लक्ष्य उनके सामने हैं। अब संजय कुमार सिंह गृहमंत्री के मिशन मोड ऑफिसर होंगे। वे स्पेशल टास्क कमांडर की तरह अपनी भूमिका निभाएंगे। वे विभाग के डाटा, रिपोर्ट और सूचनाओं का अध्ययन कर फील्ड की जमीनी हकीकत का ब्योरा तैयार करेंगे।
अगल-अलग एजेंसियों को जोड़कर इनपुट तैयार करेंगे ताकि गृह मंत्री त्वरित फैसले ले सकें। प्रशासनिक देरी को नगण्य करने के लिए ही गृह विभाग में ओएसडी को लगाया गया है। ओएसडी की निगरानी में 24 घंटे कमांड एंड कॉर्डिनेशन डेस्क काम करता है जो हर घटना का इंटेलिजेंस नोट तैयार करता है। इससे सरकार को हर अपडेट की जानकारी मिलती रहती है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने डीजीपी विनय कुमार के साथ बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि अब जवाबदेही आधारित पुलिस व्यवस्था अमल में लायी जाएगी। हर जिले के एसपी के साथ अपराध नियंत्रण का मूल्यांकन प्रतिमाह होगा। जिलों से आने वाले अपराध के आंकड़ों के आधार पर एसपी के परफॉर्मेंस का आंकलन होगा। थाना किसी भी घटना की प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर देगा। संगठित अपराध और गैंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए हर पुलिस रेंज में एटीएस (ATS) और हर जिले में एसटीएफ ( STF) के गठन की तैयारी चल रही है। ATS और STF में अति कुशल और उच्च प्रशिक्षण प्राप्त पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। यह नियुक्ति मेरिट और ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर होगी। अब सम्राट चौधरी पर दबाव है कि वह अपने पद के औचित्य को साबित करें।







