दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले के मझौलिया गांव में ग्रामीणों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। गांव के लोगों ने एक बंद घर में फंसी बिल्ली की जान बचाने के लिए तीन महीने तक लगातार उसे भोजन और पानी पहुंचाया। यह घर सरोज झा नामक व्यक्ति का था, जो दुर्गा पूजा से पहले घर में ताला लगाकर कोलकाता चले गए थे। घर बंद होने के कारण बिल्ली अंदर फंस गई थी। ग्रामीणों ने पहले मालिक को सूचना दी, लेकिन उनके गांव न आ पाने के कारण लोगों ने खुद ही जिम्मेदारी संभाली।
खिड़की और ग्रिल के जरिए रोज सुबह-शाम बिस्किट और पानी डालकर बिल्ली को जीवित रखा गया। घटना में नया मोड़ तब आया जब एक रात दूसरी बिल्ली भी उसी बंद घर में घुस गई और दोनों बिल्लियों की करुण पुकार ने पूरे गांव को परेशान कर दिया। पूरी रात घर से दर्द भरी आवाजें आती रहीं, जिसके बाद ग्रामीणों ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सरोज झा से ताला तोड़ने की अनुमति मांगी। इस बार मालिक ने सहमति दे दी। अगली सुबह गांव के लोग इकट्ठा हुए और ताला तोड़कर दोनों बिल्लियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जैसे ही दरवाजा खुला, दोनों तेजी से बाहर निकलकर खुले में दौड़ पड़ीं। ग्रामीणों की एकजुटता और दया की यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव की यह घटना दिखाती है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर जीव के लिए होनी चाहिए। तीन महीने की लगातार कोशिश, देखभाल और दया ने यह साबित कर दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। ग्रामीणों की यह पहल सोशल मीडिया पर भी खूब सराही जा रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन गई है।







