सीतामढ़ी: सूबे के सीतामढ़ी विधानसभा सीट चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही हॉट सीट बन गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर ही चुनावी सभा की। उनके कार्यक्रम के बाद सीतामढ़ी की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बहरहाल, चुनाव में वैसे तो कई खास बात है, पर सबसे रोचक बात यह है कि भाजपा और राजद प्रत्याशी दोनों ‘हमनाम’ है। भाजपा प्रत्याशी का नाम सुनील कुमार पिंटू, तो राजद प्रत्याशी का नाम सुनील कुमार है। दोनों में कांटे की टक्कर है। वैसे यह पहली बार नहीं है कि दोनों सुनील आमने-सामने हैं। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों आमने- सामने चुनाव लड़ चुके है।
तब राजद के सुनील कुमार ने बाजी मार ली थी। हालांकि इससे पहले सुनील कुमार पिंटू तीन बार जीत चुके थे। दोनों पार्टियों ने एक बड़ी ही गहरी योजना के तहत इन दोनों पर ही विश्वास कर अपना-अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा प्रत्याशी सुनील कुमार पिंटू विधायक से मंत्री और सांसद तक का सफर तय कर चुके है। खास बात यह कि विधायक बने थे भाजपा के टिकट पर, जबकि जदयू के टिकट पर सांसद बने थे। भाजपा ने अपने निवर्तमान विधायक मिथिलेश कुमार का टिकट काट कर इस बार पिंटू को दे दिया है। हालांकि क्षेत्र में इसका रिएक्शन देखा जा रहा है।
कलवार समाज से आने वाले मिथिलेश कुमार को टिकट नहीं मिलने पर उनका समाज क्षुब्ध है। इसके चलते उनके समाज के चंदेश्वर प्रसाद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर कर पिंटू के लिए एक परेशानी बन गए है। 2005 में सुनील कुमार पिंटू विधान सभा चुनाव जीते थे। 2005 के नवंबर में हुए उप चुनाव में भी पिंटू जीते थे। 2010 में पिंटू ने 5,221 मतों से जितने के साथ ही जीत की हैट्रिक लगाई थी। 2015 में सुनील कुमार पिंटू को राजद प्रत्याशी सुनील कुमार ने हरा दिया था। लेकिन 2020 में जीते हुए सुनील कुमार हार गए थे। 2025 में सुनील कुमार फिर से राजद के प्रत्याशी है।







