बक्सर: भारतीय आस्था और बिहारी संस्कृति की गूंज अब सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है। बक्सर जिले के सोनवर्षा गांव के रहने वाले दंपति ने अमेरिका में छठ महापर्व मनाकर भारतीय संस्कृति की पहचान को दुनिया में फैला दिया है। जिले के डॉ. तारकेश्वर तिवारी और उनकी पत्नी डॉ. भारती तिवारी ने अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य में पूरे विधि-विधान से छठ पर्व मनाया। भारतीय समय के अनुसार मंगलवार की सुबह जब भारत में अर्घ्य दिया गया, उसी समय अमेरिका में वहां की शाम थी और उन्होंने संध्या अर्घ्य दिया। इसके बाद भारतीय समय के अनुसार मंगलवार की रात और अमेरिकी समय के अनुसार सुबह के अर्घ्य के साथ उन्होंने व्रत संपन्न किया।
इस दंपति ने अमेरिका में छठ पर्व मनाकर न सिर्फ बिहार की संस्कृति का सम्मान बढ़ाया, बल्कि वहां भारतीय परंपराओं की गौरवशाली छवि भी पेश की। उन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजा की तैयारी की। अपने घर में कृत्रिम तालाब बनाया और उसके बीच में तुलसी का पवित्र पौधा लगाया। घर को सजाकर ऐसा माहौल बनाया गया मानो बिहार का कोई छठ घाट हो। डॉ. भारती तिवारी ने नहाय-खाय से लेकर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने तक की पूरी प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने यह पर्व अकेले नहीं, बल्कि अमेरिका में रह रहे अन्य भारतीय परिवारों के साथ मिलकर बड़े उत्साह के साथ मनाया। घर में भोजपुरी छठ गीतों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
भारतीय समय के अनुसार मंगलवार की रात को यानी अमेरिका के बुधवार की सुबह, उन्होंने सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। घर पर ही कृत्रिम तालाब और सजाए गए छठ घाट ने माहौल को पूरी तरह बिहार की छवि में ढाल दिया। डॉ. भारती तिवारी ने कहा कि छठ पूजा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वह पिछले सत्रह वर्षों से यह पर्व करती आ रही हैं। छठ के लिए जरूरी सामग्री और फल अमेरिकी बाजार में आसानी से मिल जाते हैं, जबकि पकवान वे खुद घर पर तैयार करती हैं। वहीं डॉ. तारकेश्वर तिवारी ने कहा कि भले ही हम विदेश में हैं, लेकिन अपनी भारतीय संस्कृति और बिहारी परंपराओं से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है। इस अवसर पर अमेरिका में रह रहे कई भारतीय मूल के लोग भी इस छठ पूजा में शामिल हुए और मिलकर इस पर्व को बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया।







