पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक नई परंपरा शुरू करते हुए, प्रेस कॉन्फ्रेंस की औपचारिक घोषणा को दरकिनार करते हुए, सीधे मुख्यमंत्री आवास में उम्मीदवारों को टिकट सौंपे। पूरे दिन सीएम आवास पर टिकट की उम्मीद में बुलाए गए प्रत्याशियों का तांता लगा रहा। पहली सूची में नीतीश कुमार की पुरानी और परखी हुई सोशल इंजीनियरिंग की झलक साफ दिखाई देती है। पार्टी ने ‘लव कुश’ (कुर्मी, कोइरी, धानुक, कुशवाहा) वोट बैंक और अति पिछड़ा समाज पर अपना फोकस बनाए रखा, जिसे JDU अपना कोर वोटर मानती है। JDU की पहली लिस्ट में जातीय समीकरण में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है। नीतीश कुमार ने एक बार फिर कुर्मी, कुशवाहा, मंडल, धानुक, राजपूत और भूमिहार जातियों पर ही दांव खेला है, जबकि बिहार की बहुसंख्यक यादव जाति से बचते नजर आए।
टिकट वितरण में पुराने सहयोगियों को साधने की कोशिश की गई। समता पार्टी के समय से सहयोगी रहे बैकुंठपुर के पूर्व विधायक मंजीत सिंह को पड़ोस के बरौली क्षेत्र से टिकट दिया गया है, जो उनका गृह क्षेत्र भी है। इसी तरह, बरबीघा, शेखपुरा से डॉ. कुमार पुष्पांजय को टिकट मिला है, जिनके पिता आरपी शर्मा भी पुराने सहयोगी थे। JDU अपने पारंपरिक और आजमाए हुए वोट बैंक को मजबूत कर रही है। JDU की पहली लिस्ट में ‘लव कुश’ यानी ओबीसी समाज पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। कुल 57 उम्मीदवारों में से सबसे अधिक 23 टिकट ‘लव कुश’ समाज के नेताओं को दिए गए हैं। कुर्मी, कोइरी, धानुक और कुशवाहा (KKKD) जैसी जातियां ‘लव कुश’ कैटेगरी के मुख्य वोटर माने जाते हैं। इसके अलावा, JDU ने अति पिछड़ा समाज से भी 9 प्रत्याशियों को टिकट दिया है।
लिस्ट में 12 दलितों को भी प्रत्याशी बनाया गया है। JDU की इस रणनीति के पीछे अति पिछड़ा वर्ग को साधने का लक्ष्य है, जो ‘साइलेंट वोटर’ माने जाते हैं और सामाजिक सुरक्षा का वादा करने वाले नेता को चुनते हैं। वहीं, पहली लिस्ट में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया है। JDU की पहली सूची में मौजूदा मंत्रियों को भी मौका दिया गया है। पांच मंत्रियों – रत्नेश सदा, सुनील कुमार, विजय चौधरी, महेश्वर हजारी और श्रवण कुमार को विधानसभा का टिकट दिया गया है। इसके अलावा, बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को भी टिकट मिला है। इस सूची की एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि इसमें करीब 50 फीसदी (27 उम्मीदवार) नए चेहरे हैं। कुल 57 उम्मीदवारों में से 4 महिलाएं हैं, और 11 ऐसे प्रत्याशी भी शामिल हैं जिन्हें पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।







