Home बिहार रोहतास का घिन्हू ब्रह्म मेला : आस्था या अंधविश्वास?

रोहतास का घिन्हू ब्रह्म मेला : आस्था या अंधविश्वास?

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Rohtas's disgusting Brahma fair: faith or superstition?

रोहतास: रोहतास जिले के घिन्हू ब्रह्म स्थान पर शारदीय नवरात्रि के अवसर पर एक अद्वितीय मेला लगता है,जहां का नजारा देखकर किसी की भी रूह कांप उठे. इस मेले में लोगों का मानना है कि इंसानों की शक्ल में भूत-प्रेत घूमते रहते हैं. यहां पहुंचने वाली महिलाएं और पुरुष अजीब हरकतें करते हुए देखे जाते हैं. कहीं कोई औरत जोर-जोर से सिर हिलाती नजर आती है, तो कहीं कोई महिला जमीन पर लेट कर प्रेत-आत्माओं से मुक्ति पाने के लिए प्रयास कर रही होती है. इस मेले में पूरे नवरात्रि के दौरान भूत-प्रेत का खेल चलता रहता है. यहां आने वाले अधिकांश लोग गरीब और पिछड़े वर्ग के होते हैं, जो अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए यहां आते हैं. तांत्रिक और ओझा विशेष रूप से महिलाओं को प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाने के लिए विभिन्न प्रपंच रचते हैं. मेले में युवतियों और महिलाओं पर भूतों के साये को उतारने के लिए उनकी पिटाई की जाती है. तांत्रिक उनके बाल खींच-खींचकर पीटते हैं, जिससे उनकी कथित प्रेत बाधा दूर हो सके.घिन्हू ब्रह्म स्थान पर दूर-दराज से आए लोगों का कहना है कि यहां आने से उनके मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं. तांत्रिक बाबा पूजा-पाठ कर सारी बाधाएं दूर कर देते हैं.

यहां ब्रह्म बाबा के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास अटूट है

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बतादे यहां घिन्हू ब्रह्म पर श्रद्धालुओं की श्रद्धा और अंधविश्वास की झलक देखने को मिलती है. मेले में जगह-जगह खुले बालों में रोती-चीखती महिलाएं, टेंट में झाड़-फूंक करते तांत्रिक,और बाधा दूर कराने को उमड़ी भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि अभी भी लोग अंधविश्वास में जी रहे हैं. स्थानीय लोगों में यह मान्यता है कि घिन्हू ब्रह्म में काफी शक्ति है और यहां आने से सारी समस्याएं दूर हो जाती है.मेले में ओझा-तांत्रिक खासकर महिलाओं को प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाने के लिए कई तरह के अनुष्ठान करते हैं. गरीब और पिछड़े वर्ग के लोग ही इस मेले में अधिक दिखाई देते हैं, जो अपनी समस्याओं का समाधान पाने की आशा से यहां आते हैं. इन तांत्रिकों का कहना है कि वे पूजा-पाठ और झाड़-फूंक के माध्यम से लोगों की समस्याएं दूर करते हैं.इस मेले में अंधविश्वास और वास्तविकता का टकराव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. जहां एक ओर लोग अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तांत्रिकों के पास आते हैं, वहीं दूसरी ओर यह मेला समाज में व्याप्त अंधविश्वास को भी उजागर करता है. तांत्रिकों द्वारा किए जाने वाले अनुष्ठान और झाड़-फूंक के क्रियाकलाप यह दर्शाते हैं कि कैसे अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं और विश्वासों के साथ खेला जाता है.

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