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पटना में RLM की परिसीमन सुधार महारैली, उपेंद्र कुशवाहा बोले– “बिहार के साथ हो रहा अन्याय”

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RLM's delimitation reform mega rally in Patna, Upendra Kushwaha said - "Injustice is being done to Bihar"

पटना: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा आज पटना में बड़ी रैली करेंगे। यह रैली पटना के मिलर हाई स्कूल के ग्राउंड दोपहर एक बजे से होगी। पार्टी का दावा है कि यह रैली ऐतिहासिक होने वाली है। पार्टी की ओर से कहा गया कि आज तक ऐसी रैली नहीं हुई। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज बेहद ही खास दिन है। आज पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन और बिहार के लेनिन कहे जाने वाले जगदेव प्रसाद का शहादत दिवस है। इस मौके पर पटना स्थित मिलर हाईस्कूल मैदान में राज्यस्तरीय संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार महारैली का आयोजन किया जा रहा है।

राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमारी पार्टी केवल जनता के मुद्दों की राजनीति करती है। हम हंगामा करके राजनीति नहीं करते, बल्कि जनता की समस्याओं का हल निकालने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि रैली में विशेष एजेंडा के माध्यम से लोगों को अवगत कराने का काम करेंगे, जिसका विषय परिसीमन है। परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या का निर्धारण है, जो विभिन्न राज्यों में संविधान के अनुसार किया जाता है। दस साल पर जनगणना होगी। जनगणना के उपरांत जितनी आबादी उस वक्त की होगी, उसके अनुरूप लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या भी बढ़ेगी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि संविधान की इस व्यवस्था के अनुसार सबसे पहली बार 1951 में आजादी के बाद जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ।

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1961 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, फिर 1971 की जनगणना के आधार पर भी परिसीमन हुआ। 1951 में लोकसभा सीट 494 थी, जो परिसीमन के बाद 1961 में 522 और 1971 में 543 हो गई। उसी व्यवस्था के अनुसार आगे भी परिसीमन होना चाहिए था। लेकिन, 1976 में जब आपातकाल लागू था, उस वक्त संविधान में परिवर्तन कर दिया गया और परिसीमन का कार्य रोक दिया गया, जो अभी तक रुका हुआ है। इस रुकावट से बिहार और उसके आसपास के कुछ राज्यों को बहुत नुकसान हो रहा है। अगर पुरानी व्यवस्था के अनुसार 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ होता, तो लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 40 से बढ़कर कम से कम 60 हो गई होती। विधानसभा क्षेत्र की संख्या भी उसके अनुरूप बढ़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 50 साल से यह प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे बिहार के लोगों को बड़ा नुकसान हो रहा है।


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