सासाराम: जिला मुख्यालय सासाराम की पुरानी जीटी रोड पर जाम की समस्या प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। सड़क पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ने शहर को पूरी तरह बेहाल कर दिया है। चंद मिनटों की दूरी तय करने में लोगों को घंटों लग रहे हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहर के पोस्ट ऑफिस चौराहा, कचहरी मोड़, काली स्थान, धर्मशाला मोड़ और गौरक्षणी जैसे प्रमुख स्थानों पर हर रोज सुबह 10 बजे के बाद जाम की भयावह तस्वीरें सामने आने लगती हैं। सड़कों पर वाहन रेंगते हैं, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
खासकर पोस्ट ऑफिस चौराहा पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। बुधवार को जिला प्रशासन की यातायात व्यवस्था की पोल तब खुल गई जब खुद जिलाधिकारी उदिता सिंह जाम में फंस गईं। अपने आवास से समाहरणालय स्थित कार्यालय तक महज एक किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें आधे घंटे से अधिक समय लग गया। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस और अंगरक्षकों को जाम से निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कचहरी मोड़ से समाहरणालय तक डीएम के वाहन को पहुंचाने में अंगरक्षकों के पसीने छूट गए। जाम से मुक्ति दिलाने को लेकर प्रशासन द्वारा कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया है। अवैध पार्किंग पर चालान भी किए जाते हैं।
लेकिन, लगातार और प्रभावी निगरानी के अभाव में ये अभियान असफल साबित हो रहे हैं। सड़क किनारे दुकानों, ठेले-खोमचों और बेतरतीब खड़े वाहनों पर प्रशासन का कोई प्रभाव नहीं दिखता। ट्रैफिक नियमों के पालन में वाहन चालकों और राहगीरों की लापरवाही भी व्यवस्था बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभा रही है। टेंपो, रिक्शा और सिटी बस चालक मनमाने तरीके से सड़क किनारे वाहन खड़े कर सवारियों को चढ़ाते और उतारते हैं, जिससे यातायात और बाधित हो जाता है। यातायात थाना द्वारा शहर में ट्रैफिक पुलिस बल की संख्या बढ़ाई गई है और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। ट्रैफिक पुलिस सिग्नल व नियंत्रण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में नाकाम साबित हो रही है।







