नई दिल्ली: मरीजों के फर्जी कागजों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को सख्त चेतावनी जारी की है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सभी मेडिकल कॉलेजों से मरीजों के सभी कागजात सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी जांच में मरीजों के रिकॉर्ड फर्जी पाए गए तो संबंधित संकाय प्रोफेसर और कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एनएमसी ने जारी आदेश में कहा है कि कई कॉलेजों में सभी मरीजों का आभा-आईडी दर्ज नहीं किया जा रहा है, जिससे रिकॉर्ड की प्रमाणिकता पर सवाल उठते हैं। ऐसे में आयोग ने मेडिकल कॉलेजों से प्रत्येक मरीज के कागजों पर प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर का नाम और हस्ताक्षर अनिवार्य किया है। इसी तरह सभी जांच रिपोर्ट पर संबंधित विभाग के प्रोफेसर के हस्ताक्षर होने चाहिए। इन दस्तावेजों का सत्यापन एनएमसी अपने नियमित मूल्यांकन के दौरान कर सकता है। इसमें फर्जी रिकॉर्ड पाए जाने पर फैकल्टी और कॉलेज दोनों पर कार्रवाई होगी। आयोग ने पिछले वर्ष जून 2024 में जारी एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मेडिकल कॉलेजों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का ई-रिकार्ड नहीं बनाया जा रहा है।
कई कॉलेजों में मरीजों की आभा आईडी नहीं बन रही हैं जिन पर मरीजों के सभी चिकित्सा दस्तावेज उपलब्ध होते हैं। यह एक यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी है, जिससे मरीज के इलाज का प्रमाणिक और ट्रेस करने योग्य रिकॉर्ड तैयार होता है। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आभा-आईडी न होने पर किसी भी मरीज को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा। एनएमसी सचिव डॉ. राघव लांगर ने कहा, मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी है कि वे मरीजों का असली रिकॉर्ड बनाए रखें। फर्जी आंकड़े शिक्षा और इलाज दोनों को कमजोर करते हैं। आयोग इस पर कड़ी नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई करेगा।







