उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाद और मैनपुरी जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाए जाने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी बच्चों की हालत अब स्थिर है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
फर्रुखाबाद के कमालगंज विकास खंड के राठौरा मोहद्दीनपुर स्थित जवाहर लाल प्रेमा देवी विद्यालय में करीब 150 बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली दी गई थी। दवा लेने के कुछ ही समय बाद लगभग 100 बच्चों को सिरदर्द और उल्टी की शिकायत होने लगी। इनमें से 33 बच्चों को कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 67 को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हाल जाना। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि अन्य स्कूलों में भी दवा दी गई थी, लेकिन समस्या केवल इसी विद्यालय में सामने आई।
मैनपुरी के नगला कीरतपुर स्थित एक सरकारी कम्पोजिट स्कूल में भी दवा खाने के बाद करीब दो दर्जन छात्र बीमार पड़े। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.सी. गुप्ता ने बताया कि अधिकांश बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो बच्चों को पेट दर्द की शिकायत पर निगरानी में रखा गया।
घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी ने इसे “मेडिकल इमरजेंसी” बताते हुए नकली दवा दिए जाने का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी ने प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया। एबीवीपी ने भी उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस हर साल 10 फरवरी और 10 अगस्त को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त कर उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार करना है।







