उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित जापान यात्रा को लेकर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जापान के क्योटो शहर का दौरा जरूर करना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि वाराणसी का विकास क्योटो की तर्ज पर क्यों नहीं हो पाया।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि क्योटो और वाराणसी के बीच सांस्कृतिक और विरासत के स्तर पर समानताएं होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकी। उन्होंने तंज कसते हुए मुख्यमंत्री की यात्रा को “मनसुख-पर्यटन” बताया और सवाल उठाया कि क्या इस दौरे से कोई ठोस विकास योजना सामने आएगी या यह सिर्फ औपचारिक दौरा बनकर रह जाएगा।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी की 2014 की जापान यात्रा के दौरान वाराणसी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और शहरी विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना था। विपक्ष का आरोप है कि इस समझौते के बावजूद वाराणसी में अपेक्षित स्तर का परिवर्तन नहीं दिखा।
अखिलेश यादव ने इस दौरान उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासी समुदायों को चुनिंदा रूप से नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से मिलने की तैयारी कर रही है और जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपनी बात रखेगा।
इस बीच, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 3 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।







