दरभंगा: दरभंगा के डीएमसीएच में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि इलाज कर रहे डॉक्टर की लापरवाही के कारण सुनीता देवी की जान गई। घटना की सूचना मिलते ही बेंता थाना और डायल 112 की पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया। बताया जा रहा है कि डीएमसीएच में तीन दिनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जब मरीजों के परिजनों को हंगामा करना पड़ा है। दो दिन पहले इमरजेंसी विभाग में करीब दो घंटे तक ऑक्सीजन पाइप लाइन से सप्लाई बंद हो गई थी।
उस दौरान एक गंभीर मरीज को बिना इलाज के ही पटना रेफर कर दिया गया था। उस घटना को लेकर भी काफी हंगामा हुआ था। मृतका की पहचान कमतौल थाना क्षेत्र के गंज रघौली माधोपट्टी वार्ड नंबर 11 निवासी सुनीता देवी के रूप में हुई है। उन्हें ब्रेन हेमरेज की शिकायत के बाद डीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। पहले उन्हें इमरजेंसी में रखा गया, बाद में डॉक्टरों ने मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया। परिजनों के अनुसार रविवार की दोपहर इलाज के दौरान सुनीता देवी की मौत हो गई। मृतका की बड़ी बेटी पंचो देवी ने आरोप लगाया कि जब मरीज की बेचैनी बढ़ी तो वह नर्स को तीन चार बार बुलाने गईं, लेकिन कोई नहीं आया। काफी देर बाद निहोरा करने पर डॉक्टर पहुंचे और ऑक्सीजन लगाने और दवा चढ़ाने की बात कही। परिजनों का कहना है कि दवा और ऑक्सीजन समय पर नहीं लगाया गया, जिस कारण उनकी मौत हो गई।
बेटी ने आरोप लगाया कि जब वह नर्स को बुलाने गईं तो नर्स ने पहले शिकायत करने की बात कही। उनका कहना है कि समय पर इलाज और दवा नहीं मिलने से उनकी मां की जान चली गई। परिवार के लोगों ने बताया कि सुनीता देवी के चार बेटियां और एक बेटा है। बेटे की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है, इसलिए वे निजी अस्पताल की जगह डीएमसीएच में इलाज के लिए लाए थे। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हल्ला हंगामा किया। अस्पताल की सूचना पर बेंता थाना की पुलिस पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। इस मामले में बेंता थानाध्यक्ष विनय मिश्रा ने बताया कि अस्पताल से सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया गया और शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया।







