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एक सीट पर तीन बहुओं की भिड़ंत, 14 नवंबर को होगा जीत-हार का फैसला

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Three daughters-in-law are fighting for one seat, victory or defeat will be decided on November 14.

सीतामढ़ी: कल यानी 14 नवंबर को फैसला हो जाएगा कि बिहार में किसकी सरकार बनेगी। लेकिन इसी के साथ सीतामढ़ी की 3 बहुओं का फैसला भी जनता करेगी। तीनों ही बहुएं परिहार सीट से एक दूसरे के आमने-सामने हैं। खास बात यह है कि परिहार से तीन बहुओं में ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। इन तीनों बहुओं की अलग अलग खासियत और पहचान है। बहरहाल, इन तीनों बहुओं ने माननीय बनने/कहलाने के लिए चुनाव प्रचार में काफी पसीना बहाया है। बहरहाल, तीनों बहुओं की मेहनत का पता 14 नवंबर को पता चलेगा, जब मतगणना होगी। फिलहाल, हार-जीत का कयास और जोड़-घटाव का हिसाब किया जा रहा है। ये तीनों प्रत्याशी अपने लोगों के जरिए पंचायत और गांव के वोटरों और उन वोटरों में से प्राप्त वोटों का आंकड़ा मिलवा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी गायत्री देवी जीत की हैट्रिक लगाने को लेकर उम्मीद कर रही हैं।

इससे पहले गायत्री 2015 और 2020 में परिहार विधानसभा सीट जीत चुकी हैं। वहीं, उनके पति रामनरेश यादव साल 2010 में विधायक बने थे। पिछली बार काफी कम वोटों के अंतराल से गायत्री देवी जीत सकी थीं। जानकारों का कहना है कि इस बार गायत्री देवी जीत दर्ज करती हैं, तो इसमें अप्रत्यक्ष रूप से रितु जायसवाल का हाथ होगा। कारण कि रितु जितनी वोट हासिल करेंगे वो महागठबंधन के होंगे। ऐसे में इसका फायदा भाजपा प्रत्याशी को होगा। राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की प्रतिष्ठा दांव पर है। कारण कि राजद प्रत्याशी उनकी पुत्रवधू स्मिता गुप्ता हैं। डॉ पूर्वे खुद विधायक रह चुके हैं। वे साल 2010 में भाजपा के रामनरेश यादव से हार गए थे, जबकि 2015 में उन्हें यादव की पत्नी गायत्री देवी से हार का सामना करना पड़ा था। 2020 में राजद ने रितु जायसवाल को टिकट देकर पार्टी ने गेम खेलने की कोशिश की थी। हालांकि इस गेम को विफल कर गायत्री देवी ने दूसरी बात जीत दर्ज कर ली थी। रितु ने अपनी हार का मुख्य कारण डॉ पूर्वे को एक बार नहीं, बल्कि कई बार बताया है।

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इस बार राजद ने रितु को दरकिनार कर पूर्व की पुत्रवधु को टिकट दिया है। वैसे जानकार कहते हैं कि रितु के बागी उम्मीदवार होने चलते राजद प्रत्याशी स्मिता गुप्ता की जीत उतनी आसान भी नहीं लग रही है। बहरहाल, स्मिता हारती हैं, तो इसका मुख्य कारण रितु को ही माना जाएगा। तीसरी बहू रितु जायसवाल हैं, जिन्होंने परिहार सीट को हॉट सीट बना दिया है। यह वही रितु हैं, जो हाल में भीषण गर्मी के दौरान अपने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़ी थी, जब लोग पेयजल संकट से जूझ रहे थे। पेयजल के लिए टैंकर से पानी की व्यवस्था कराई थी। बराबर क्षेत्र में रहती थीं। चुनाव परिणाम चाहे जो हों, वह खास कर राजद प्रत्याशी के लिए एक बड़ी मुश्किल बन गई है। चर्चा तो यह भी है कि रितु जीत-हार का पासा भी पलट सकती हैं। राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रितु को पार्टी ने बेलसंड से टिकट का ऑफर दिया था। वह उसे ठुकरा कर परिहार से निर्दलीय चुनाव लड़ी हैं। सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रितु 2020 में विधानसभा और 2024 में राजद के टिकट पर लोकसभा का चुनाव हार चुकी हैं।

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