सीएम नीतीश की कैबिनेट बैठक में कुल 32 एजेंडों पर लगी मुहर
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 32 एजेंडों पर मुहर लगी है। इन एजेंडों में सबसे अहम और चर्चा का विषय बना बिहार सरकार के कर्मचारियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़ा फैसला। सोशल मीडिया पर रील्स, वीडियो और पोस्ट बनाकर ‘स्टार’ बन रहे सरकारी कर्मचारियों पर सरकार सीधी कार्रवाई करेगी। सरकार ने साफ कहा है, सरकारी नौकरी का मतलब अनुशासन है, न कि रील्स और लाइक है। रील्स और सोशल मीडिया के जरिए अब सरकारी कर्मचारी पैसे नहीं कमा सकेंगे, जिसमें वो अपने विभाग से जुड़े पोस्ट डालते है रिल्स बनाते है। उसपर पूरी तरह से बैन लग गया है।
कैबिनेट के बाद CM नीतीश ने X पर बताया कि राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की थी।
इस योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, ताकि हर परिवार की एक महिला उद्यमी बन सके। योजना के पहले चरण में महिलाओं को 10-10 हजार रुपए की सहायता दी गई है। अब तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं के खातों में DBT के माध्यम से राशि भेजी जा चुकी है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बचे हुए आवेदकों को भी नियम के अनुसार जल्द ही उनके खाते में पैसा भेजा जाएगा। CM ने आगे बताया कि योजना के तहत रोजगार शुरू करने के 6 महीने बाद आंकलन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर महिलाओं को 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता राशि देने का प्रावधान है।
सरकार ने इसके लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है। यह राशि किस्तों में दी जाएगी, बशर्ते पहले दी गई राशि का सही उपयोग रोजगार में किया गया हो। अगर रोजगार अच्छा चल रहा होगा तो जरूरत के अनुसार एकमुश्त राशि भी दी जा सकती है।
सरकार ने विभाग को यह भी निर्देश दिया है कि योजना से जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था की जाए। साथ ही लाभार्थियों को पोशाक निर्माण, सुधा बिक्री केंद्र और दीदी की रसोई जैसे सरकारी कार्यों से जोड़ा जाएगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना की राशि बढ़ाने का फैसला किया है। अब कक्षा 1 से 4 तक के छात्रों को ₹1200 सालाना, कक्षा 5 से 6 तक ₹2400, कक्षा 7 से 10 तक ₹3600 और कक्षा 1 से 10 तक के छात्रावासी छात्रों को ₹6000 सालाना स्कॉलरशिप मिलेगी। पहले यह राशि साल 2011 में तय की गई थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है। यह स्कॉलरशिप सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को दी जाएगी। इस योजना से करीब 27 लाख छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा।







