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यूरिया की काला बाजारी का मामला विधानसभा में गूंजा, अध्यक्ष ने कहा समीक्षा के बाद कार्रवाई होगी

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The issue of black marketing of urea resonated in the Assembly, the Speaker said action will be taken after review.

पटना। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुनार ने सदन में किसानो के शोषण और यूरिया की कालाबाजारी का मामला उठाये जाने के बाद कहा कि सरकार इसकी समीक्षा करने के बाद कार्रवाई करेगी। यूरिया की कालाबाजारी पर विधायक देवेशकांत सिंह, मंजीत सिंह और पांच अन्य विधायकों के ध्यानाकर्षण पर सरकार की तरफ से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के जवाब के बाद अध्यक्ष श्री कुमार ने कहा कि इस मामले में सरकार ने संज्ञान ले लिया है और इसकी समीक्षा के बाद कार्रवाई होगी।

उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा ने सदन में ध्यानाकर्षण का जवाब देते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्या के प्रति सजग है और किसी भी उत्पादक कम्पनी या वितरित करने वाले प्रतिष्ठान की तरफ से गड़बड़ी की हालत में उर्वरक नियंत्रक आदेश 1985 और वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि सभी उर्वरक विक्रेताओं को खुदरा दुकानों तक उर्वरक पहुंचा कर उपलब्ध करवाना है और किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना मिलने पर सरकार छापेमारी कर इसका उद्भेदन और कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि अब तक 104 उर्वरक प्रतिष्ठानों के ऊपर अनियमितता पाए जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है और 419 का प्राधिकार पत्र रद्द किया गया है। अपने पूरक सवाल के माध्यम से विधायक श्री देवेश कांत ने कहा कि उर्वरक सप्लाई करने वाली कम्पनियां जिला केंद्रों तक उर्वरक उपलब्ध करवा देती हैं और उसके आगे का भाड़ा खुदरा विक्रेताओं को वहन करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में खुदरा विक्रेता भाड़े के नाम पर निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत वसूल कर किसानों को खाद बेचते हैं, जिससे किसानों में आक्रोश है।

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उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की जांच करे कि कंपनियां खुदरा विक्रेताओं के खाते में भाड़े की राशि जमा कर रही हैं या नही। विधायक मंजीत सिंह ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि भारत सरकार के खाद मंत्रालय से जारी अधिसूचना के अनुसार कम्पनियों को निर्देश है कि वह खुदरा विक्रेताओं को उनके प्रतिष्ठान तक खाद तय कीमत पर पहुंचाए और इसके लिए अतिरिक्त कोई भाड़ा वसूल नही करें, लेकिन कम्पनियों की मनमानी जारी है और अतिरिक्त भाड़ा लगने की वजह से 266 रुपये में बिकने वाला यूरिया अब 350 से 400 में बिक रहा है। उन्होंने कहा कि खाद विक्रेताओं को यूरिया उपलब्ध कराने से पहले डीएपी तथा अन्य उर्वरकों को भी खरीदने की शर्त रखी जाती है और उनका कोटा निर्धारित कर दिया जाता है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इसकी समीक्षा करने के साथ उचित कार्रवाई करेगी।

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