बेगूसराय: बिहार विधानसभा चुनाव में बेगूसराय की सुरक्षित बखरी विधानसभा सीट पर चर्चा में रहेगी। इस सीट को वाम दलों का ‘गढ़’ माना जाता है, क्योंकि बखरी विधानसभा में अभी तक के 17 चुनाव में रिकॉर्ड 11 बार सीपीआई ने चुनाव जीता है तो तीन बार कांग्रेस और दो बार राजद और एक बार बीजेपी यहां से चुनाव जीत पायी है। इस बार पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां 777 वोट के अंतर से हार मिली थी। इस बार एनडीए ने बखरी सीट के लिए अपनी रणनीति बदली है। बीजेपी ने ये सीट लोजपा (रामविलास) को दे दी। एनडीए से लोजपा (आर) के संजय पासवान चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं महागठबंधन की ओर से सीपीआई के सूर्यकांत पासवान चुनावी मैदान हैं। ‘777 वाली जंग’ में अब कौन बाजी मारेगा? इसका पता 14 नवबंर को चलेगा। बखरी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने 1952, 1957 और 1962 में चुनाव जीत दर्ज की तो राजद को 2000 और 2015 में यहां जीत मिली। वहीं भाजपा ने 2010 में यहां से पहली बार ‘कमल’ खिलाया था।
पिछले दो दशक के चुनाव की बात की जाए तो 2000 में राजद ने रामानंद राम को चुनावी मैदान में उतरा तो उन्होंने सीपीआई के मजबूत गढ़ को तोड़ते हुए पहली बार चुनाव जीता। 2005 के दोनों चुनाव में सीपीआई के राम विनोद पासवान ने राजद के रामानंद राम को पराजित किया। 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद के रामानंद राम ने बीजेपी का दामन थाम कर चुनाव लड़ा तो पहली बार बीजेपी का कमल रामानंद राम ने ही खिलाया, जहां बीजेपी उम्मीदवार रामानंद राम को 43871 जब की सीपीआई के कई बार के विधायक राम विनोद पासवान को 25459 मत प्राप्त हुआ था। 2015 के चुनाव में राजद ने उपेंद्र पासवान को चुनावी मैदान में उतारा तो उन्होंने 72632 मत लाकर भाजपा के रामानंद राम को 40000 से ज्यादा मतों से पराजित किया। 2020 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत राजद की सीटिंग सीट रहते हुए तेजस्वी ने यह सीट सीपीआई को दी तो पहली बार मुखिया से विधायक का चुनाव लड़ रहे सूर्यकांत पासवान ने भाजपा के राम शंकर पासवान को मात्र 777 वोट से पराजित किया।
सूर्यकांत पासवान को 72177 वोट मिले, जबकि रामशंकर पासवान को 71400 मत प्राप्त हुआ था। वहीं लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो 2019 और 2024 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं गिरिराज सिंह को बखरी विधानसभा से बढ़त मिली थी। मतदाताओं की बात की जाए तो बखरी विधानसभा में लोकसभा चुनाव 2024 के समय 305120 मतदाता थे, जबकि मतदाता गहन पुनरीक्षण के बाद बखरी विधानसभा में 287076 मतदाता ड्राफ्ट रोल में किए गए हैं। बखरी विधानसभा कृषि आधारित विधानसभा है । मुख्य रूप से मक्के का उत्पादन सर्वाधिक होता है उसके बाद गेहूं धान का उत्पादन भी होता है। लेकिन किसानों के लिए बाजार उपलब्ध नहीं है किसानों की समस्या बड़ा मुद्दा है। वहीं बखरी बाजार में हमेशा जलजमाव की एक बड़ी समस्या रहती है इससे भी लोगों में नाराजगी देखी जा रही है । बखरी हसनपुर रूट पर लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। शिक्षा रोजगार भी इस बार बड़ा मुद्दा बनाकर उभरेगा। बखरी विधानसभा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र है यहां सबसे बड़ी आबादी दलित समाज की है, जहां सबसे अधिक वोटर पासवान समाज से आते हैं। जबकि दूसरे स्थान पर जोलहा तांती समाज का अत्यधिक वोटर है। वैश्य कुशवाहा समाज के वोटर भी निर्णायक भूमिका में होते हैं। यादव मुसलमान और सवर्ण मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है।







