पटना: बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के ‘विदेश दौरे’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। रविवार को बीजेपी के मंत्री प्रमोद कुमार ने तेजस्वी के विदेश प्रवास की जांच की मांग करते हुए कहा कि वह नए गठित बिहार विधानसभा के चल रहे सत्र के बीच कथित तौर पर विदेश चले गए। एनडीए नेताओं का आरोप है कि सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष की लंबी गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। सहकारिता तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का प्रभार संभाल रहे मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि जिस तरह सरकार तेजस्वी के परिवार की संपत्तियों की जांच कर रही है, उसी तर्ज पर उनके विदेश दौरे की भी गहन जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि तेजस्वी यादव कहां थे। मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष कोई साधारण पद नहीं होता। यह एक संवैधानिक पद है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि वह इतने लंबे समय तक कहां रहे, किन लोगों से मिले और विदेश में उन्होंने क्या गतिविधियां कीं।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि न तो पार्टी ने और न ही राज्य की जनता को उनकी अनुपस्थिति की जानकारी दी गई। इस मुद्दे पर जनता दल (यूनाइटेड) ने भी तेजस्वी यादव पर निशाना साधा।
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने उन्हें ‘गैर-गंभीर’ नेता करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका सत्तापक्ष जितनी ही अहम होती है, लेकिन तेजस्वी विधानसभा सत्र के दौरान अचानक गायब हो गए। उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन आरजेडी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। एनडीए के आरोपों पर पलटवार करते हुए आरजेडी ने कहा कि बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव पर भरोसा जताया है और वह उस पर खरे उतरेंगे। आरजेडी के महासचिव और मोरवा से विधायक रणविजय साहू ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन को चिंता करने की जरूरत नहीं है। पार्टी जल्द ही पलायन, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू करेगी।







