
सीतामढ़ी : सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की जब-तब कई विभागों में ड्यूटी लगा दी जाती है। यानी उन्हें प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर भेज दिया जाता है। कभी वे जनगणना के काम में लगा दिए जाते हैं तो कभी चुनाव प्रक्रिया की ड्यूटी पर भेज दिए जाते हैं। सरकार के इस रुख का एक शिक्षक ने फर्जीवाड़ा करके फायदा उठाया। वह न तो स्कूल गया, न प्रतिनियुक्ति स्थल पर गया। जब स्कूल में ब्लॉक एजुकेशन आफिसर (बीईओ) ने दौरा किया तो शिक्षक की कारस्तानी उजागर हो गई। सीतामढ़ी जिले में शिक्षकों द्वारा अधिक बच्चों की हाजिरी बनाकर एमडीएम का खाद्यान्न और राशि हजम कर लेना तो आम बात हो गई है, लेकिन अब एक शिक्षक ने ऐसा कारनामा किया है, जिसकी कल्पना भी कभी शिक्षा विभाग ने नहीं की थी। शिक्षक सर्वेश कुमार ने फर्जी पत्र बनाकर विभाग को धोखा दिया और 20 दिन तक आराम से छुट्टी मनाते रहा।
शिक्षक का यह कारनामा जानकार विभाग के अधिकारी हैरान हैं। यह मामला जिले के बाजपट्टी प्रखंड के मध्य विद्यालय बसौल उर्दू में सामने आया है। यहां के एक शिक्षक सर्वेश कुमार ने प्रतिनियुक्ति का फर्जी पत्र बनाया और 20 दिनों तक बिना स्कूल गए वेतन हासिल कर लिया। जब बीईओ स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो उनकी कारगुजारी उजागर हो गई। बताया गया है कि बीईओ अभय कुमार सोमवार, 8 दिसंबर को उक्त विद्यालय का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। उन्हें पता चला कि एक साथ नौ शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं। यह बात उन्हें नहीं पची। उन्होंने पाया कि एक शिक्षक सर्वेश कुमार 18 नवंबर 25 से स्कूल नहीं आ रहे है। बीईओ को संदेह हुआ। प्रधान शिक्षक नूर आलम ने बीईओ के समक्ष प्रतिनियुक्ति का पत्र (पत्रांक- 96, दिनांक- 18 नवंबर 2025) प्रस्तुत किया, जिसमें सर्वेश कुमार समेत दो शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का जिक्र था।
उन्होंने प्रतिनियुक्ति के पत्र की जांच की। वह पत्र उन्हें संदिग्ध लगा। पत्र में सर्वेश कुमार को बाजपट्टी प्रखंड कार्यालय में निर्वाचन कार्य के लिए प्रतिनियुक्ति का जिक्र था। इसके बाद बीईओ ने प्रखंड कार्यालय से संपर्क किया। वहां से उन्हें जवाब मिला कि शिक्षक सर्वेश कुमार की प्रतिनियुक्ति का कोई पत्र प्रखंड कार्यालय से नहीं भेजा गया है। सर्वेश कुमार एक भी दिन प्रखंड कार्यालय में देखे नहीं गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक शिक्षक सर्वेश कुमार अब बुरी तरफ फंस गए हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होने की संभावना है। जांच में यह साफ हो गया है कि शिक्षक न केवल लगातार स्कूल से नदारद थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति का फर्जी पत्र बनाकर उन्होंने सिस्टम को धोखा दिया है। फर्जी पत्र के सहारे विभाग को गुमराह करने वाला शिक्षक विभागीय अधिकारियों की नजरों में बेनकाब हो चुका है। जांच में जो सच्चाई सामने आई है, उसे जानकर अधिकारियों के साथ-साथ शिक्षक गण भी हैरान हैं। यदि बीईओ स्कूल में निरीक्षण के लिए नहीं गए होते तो संभव है यह मामला उजागर ही न होता।






