सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में कुत्तों का आतंक कायम है। कब और किसे आवारा कुत्ते अपना शिकार बना ले, ये कहना मुश्किल है। शहर में दिन ब दिन आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन कुत्तों से निबटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्तर से निर्देश दिए जा चुके हैं। निर्देशों से नगर निगम प्रशासन पूरी तरह अवगत है। बावजूद कार्रवाई के नाम पर अभी ‘पानी पर लाठी’ ही मारा जा रहा है। ये हालात तब है कि जब पूरे जिले में सालाना करीब 14 हजार और प्रतिमाह औसतन डेढ़ हजार लोग कुत्तों के काटने से जख्मी होते हैं। सीतामढ़ी में एक तरह से लोगों को अपराधी से कहीं अधिक कुत्तों से डर लगने लगा है। ये डर लाजिमी है। दरअसल, एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कुत्तों ने 55 हजार लोगों (महिला, पुरूष और बच्चों) को काट कर जख्मी कर चुका है। ये आंकड़ा 2022 से 2025 तक का है। वर्ष 2025 के दिसंबर में सिर्फ सदर अस्पताल में कुत्तों के काटने से 1810 जख्मी इलाज कराने के लिए आए थे।
पीएचसी और सीएचसी में इलाज के लिए गए मरीजों का आंकड़ा अलग है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि यहां प्रतिदिन छह से सात मरीज (कुत्ता के काटने से जख्मी) आते हैं। जिले में कुत्तों के काटने से जख्मी लोगों का आंकड़ा चौंकाने वाला रहा है। ये डेटा उन जख्मी का है, जो सदर अस्पताल में इलाज कराए हुए हैं। सीएचसी और पीएचसी में भी कुछ मरीज इलाज के लिए गए होंगे। ये संख्या जोड़ने पर जख्मी मरीजों का आंकड़ा कुछ और ही हो जाएगा। इतना ही नहीं, बॉर्डर इलाके के लोग कुत्तों के काटने से जख्मी होने पर इलाज के लिए नेपाल भी चले जाते हैं। वहीं, कुछ लोग जख्म हल्का होने की बात कह दुकानों से खुद दवा ले लेते हैं और इलाज ही नहीं कराते हैं। इन तमाम आंकड़ों को जोड़े जाने पर अप्रत्याशित संख्या हो जाएगी। सदर अस्पताल से मिली रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के जुलाई में 1373 मरीजों (कुत्तों के काटने से जख्मी) का इलाज हुआ था, तो अगस्त में 1194, सितंबर में 1099, अक्टूबर में 1220, नवंबर में 1383, दिसंबर में 1810 का चिकित्सा की गई थी।
इस तरह जिले में कुत्तों के काटने से औसतन प्रतिमाह करीब 1500 लोग जख्मी हो रहे हैं। बावजूद प्रशासन आवारा कुत्तों से निबटने के बजाए हाथ पर हाथ रख बैठा हुआ है। आवारा कुत्तों से शहरवासी दशकों से परेशान हैं। कोई ऐसा दिन नहीं, जिस दिन लोग कुत्तों के शिकार नहीं होते हैं। शहर में खास कर पैदल सफर करने वाले लोग आवारा कुत्तों से सशंकित रहते हैं। सचेत रहने के बावजूद प्रतिदिन आधा दर्जन लोग शिकार बन जाते हैं। आवारा कुत्तों से निबटने के प्रति नगर निगम प्रशासन भी काफी सुस्त है। कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस का निर्माण कराया जाना है, जहां विक्षिप्त और अन्य आवारा कुत्तों की नशबंदी या प्रजनन क्षमता को नष्ट करने का टीका लगाया जाना है। ये सब अभी तक फाइलों में ही सीमित है। उप नगर आयुक्त कुलदीप सिन्हा और सिटी मैनेजर अमरजीत कुमार ने बताया कि आवारा कुत्तों को लेकर सरकार का निर्देश आया है। योजना बनाई जा रही है। डॉग कैचर व्हीकल की खरीद होगी। इसके अलावा अन्य छोटे उपकरणों की भी खरीदारी करनी पड़ेगी। निगम के सामान्य बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति से डॉग कैचर व्हीकल की खरीदारी के लिए अनुमोदन कराने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।







