पटना: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें ‘स्पॉइल्ड जीनियस’ बताते हैं—ऐसा नेता जिसके पास असाधारण राजनीतिक क्षमता और मजबूत जनाधार है, लेकिन वह अपनी ताकत का पूरा राजनीतिक लाभ नहीं उठा सका। 2024 लोकसभा चुनाव में पूर्णिया से निर्दलीय जीत दर्ज कर उन्होंने यह साबित किया कि वे लालू यादव और नीतीश कुमार जैसे दिग्गजों के विरोध के बावजूद चुनाव जीत सकते हैं।
इसके बावजूद पप्पू यादव लगातार कांग्रेस और राजद जैसे दलों में जगह तलाशते रहे, जहां उन्हें सम्मान और भरोसेमंद राजनीतिक ठिकाना नहीं मिला। कांग्रेस ने 2024 में उन्हें पूर्णिया से उम्मीदवार नहीं बनाया, जबकि राजद से भी उनकी बातचीत शर्तों पर आकर टूट गई। दोनों दलों से किनारा किए जाने के बाद पप्पू यादव को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। अब सवाल उठ रहा है कि एक मजबूत क्षेत्रीय नेता होने के बावजूद पप्पू यादव अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को आगे क्यों नहीं बढ़ा पा रहे हैं।







