
पटना: बिहार विधानसभा चुनावों के लिए जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपना सीट बंटवारा फाइनल कर लिया है, वहीं महागठबंधन में अभी भी सीटों की गुत्थी उलझी हुई है। हालांकि महागठबंधन ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लिया है। इस बीच, महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी सीपीआई (एमएल) ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें अपने सहयोगियों को समायोजित करने के लिए यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और उन्हें कम सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए।
दीपांकर भट्टाचार्य ने ET से बातचीत में कहा कि बिहार चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, ऐसे में विरोधी गठबंधन को जल्द ही सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘RJD और कांग्रेस को अपने सहयोगियों के लिए कम सीटें छोड़नी चाहिए, ताकि महागठबंधन को NDA के खिलाफ मजबूत किया जा सके।’ दीपांकर भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि उनकी पार्टी का प्रदर्शन 2020 के चुनावों में शानदार रहा था। उनकी पार्टी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 12 पर जीत हासिल की थी।
उन्होंने बताया कि आरजेडी ने सीपीआई (एमएल) को वही 19 सीटें ऑफर की थीं, जिसे पार्टी ने अस्वीकार्य बताते हुए ठुकरा दिया है। सीपीआई (एमएल) ने अब लगभग 30 सीटों की एक नई सूची RJD को भेजी है। दीपांकर ने कहा कि जो 30 सीटें आरजेडी के पास भेजी हैं, उनपर कोई मोलभाव नहीं किया जा सकता है। महागठबंधन में सीट बंटवारे में हो रही देरी का एक कारण नए सहयोगियों का प्रवेश भी है। दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि 2020 में यह गठबंधन मूल रूप से पांच पार्टियों (RJD, कांग्रेस, CPI-ML, CPI और CPI-M) का था, लेकिन अब इसमें विकासशील इंसान पार्टी (VIP), रालोजपा (RLJP) और संभवतः झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी शामिल हो रहे हैं। इस वजह से सीट बंटवारे में टाइम लग रहा है।






