पितृ मोक्ष अमावस्या पर सम्राट चौधरी ने पूर्वजों को किया नमन
Samrat Chaudhary paid tribute to his ancestors on Pitru Moksha Amavasya.

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर सभी पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कामना की कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आभार प्रकट करने का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि पितृ मोक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर वह समस्त पितरों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने इस पर्व को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

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पितृ मोक्ष अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और पूर्वजों के श्राद्ध, तर्पण तथा पिंडदान के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन उन पितरों के निमित्त भी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं हो पाता।

इस अवसर पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, लोग विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध करते हैं तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान देते हैं। मान्यता है कि पितरों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

बिहार के गया जी सहित देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। गया जी को पितृ कर्म और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। यहां श्रद्धालु फल्गु नदी सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर तर्पण और पिंडदान की परंपरा निभाते हैं।

पितृ मोक्ष अमावस्या भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में पारिवारिक संबंधों, पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक मानी जाती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपने संदेश के माध्यम से इस अवसर पर पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की कामना की।