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समस्तीपुर में अब तक 43.88% मतदान, नीतीश के करीबी विजय चौधरी की किस्मत दांव पर

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Samastipur polls 43.88% so far, Nitish's close aide Vijay Chaudhary's fate at stake

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले की सरायरंजन सीट पर वोटिंग जारी है। दोपहर 1 बजे तक समस्तीपुर जिले में 43.03 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला है। जिसमें सरायरंजन सीट का प्रतिशत 43.88 रहा। कुल 8 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। समस्तीपुर से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरायरंजन केवल एक प्रखंड (ब्लॉक) नहीं है, बल्कि यह उत्तर बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था का एक ऐसा केंद्र है, जहां की हर चुनावी फसल राज्य के बड़े दलों के भविष्य की दिशा तय करती है। बिहार की ये एक वीवीआईपी सीट है, जहां से नीतीश कुमार के करीबी विजय कुमार चौधरी विधायक हैं। अक्सर नीतीश कुमार के आसपास मुस्कुराते हुए विजय चौधरी दिखते हैं। अपनी हाजिरजवाबी के लिए भी विजय चौधरी काफी मशहूर है। आज उनकी किस्मत ईवीएम में कैद हो रही है। सरायरंजन में करीब तीन लाख वोटर हैं।

  • सुबह 9 बजे तक 13.06% वोट पड़े।
  • विजय कुमार चौधरी- जनता दल (यूनाइटेड) (JDU, वर्तमान विधायक
  • अरविंद कुमार सहनी- राष्ट्रीय जनता दल (RJD), महागठबंधन उम्मीदवार
  • इसके अलावा, कुछ अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिनमें निर्दलीय और छोटे दलों के प्रत्याशी शामिल हैं।
  • साजन कुमार मिश्रा- जन सुराज पार्टी
  • राम सागर राय- अपना किसान पार्टी
  • अमरेंद्र कुमार सिंह- निर्दलीय
  • अशोक कुमार अंजना- निर्दलीय
  • कुणाल कुमार- निर्दलीय
  • रणजीत कुमार पंडित- निर्दलीय

ये हाई-प्रोफाइल सीट है। यहां मुख्य मुकाबला JDU के विजय कुमार चौधरी और RJD के अरविंद कुमार सहनी के बीच है। सरायरंजन वो भूमि है जहां 2020 के चुनाव में एक ऐसी कड़ी राजनीतिक जंग लड़ी गई जिसने सबकी सांसें थाम दी थीं। 2020 में इस सीट से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार और बिहार सरकार के कद्दावर नेता विजय कुमार चौधरी ने जीत हासिल की थी, लेकिन ये जीत पहले जैसी आसान नहीं थी। उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल उम्मीदवार अरविंद कुमार सहनी को सिर्फ 3,624 वोटों के मामूली अंतर से हराया। 2025 में भी विजय कुमार चौधरी का मुकाबला आरजेडी के अरविंद कुमार सहनी से ही है। सरायरंजन सीट पर सबसे अधिक यादव मतदाता हैं। चुनाव में भूमिहार और ब्राह्मण वोट बैलेंस करता है। मुस्लिम वोटर भी अच्छी संख्या में ठीकठाक हैं। वर्तमान में, इस सीट पर सबसे सफल दल जनता दल (यूनाइटेड) रहा है। विजय कुमार चौधरी बीते 15 वर्षों से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मौजूदा समय में वो नीतीश सरकार में जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग के मंत्री हैं।

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ये सीट अनारक्षित (जनरल) श्रेणी की है। यहां का जातीय और सामुदायिक समीकरण चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस बार के विधानसभा चुनाव में इस सीट से जदयू और राजद के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है, क्योंकि अब तक के चुनावी इतिहास में इस सीट से दोनों प्रमुख पार्टियों को यहां की जनता ने अपना भरोसा जताया है। दिलचस्प बात ये है कि इस क्षेत्र के ग्रामीण और जागरूक मतदाताओं ने विभिन्न विचारधाराओं को समर्थन दिया है, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टियों को अब तक एक भी जीत नहीं मिली है, जो यहां के चुनावी रुझानों की एक अनूठी विशेषता मानी जाती है। सरायरंजन विधानसभा सीट की स्थापना 1967 में हुई थी। ये सीट समस्तीपुर जिले के छह विधानसभा खंडों में से एक है और उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पिछले विधानसभा चुनावों के सफर में सरायरंजन के मतदाताओं ने कई राजनीतिक दलों को मौका दिया है। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस से लेकर भारतीय जनसंघ (बीजेएस) ने भी इस सीट से सफलता का स्वाद चखा है। साल 2010 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से जदयू के विजय कुमार चौधरी ने राजद के रामाश्रय सहनी को कांटे की टक्कर में लगभग 17,000 मतों से हराया था। 2015 में जदयू ने महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

भाजपा ने रंजीत निर्गुणी को मैदान में उतारा और जदयू की जीत का अंतर बढ़ गया। 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने अपना उम्मीदवार बदलकर अरविंद कुमार सहनी को मैदान में उतारा, मगर जदयू फिर से जीत गई। सरायरंजन की आत्मा इसके खेतों में बसती है। ये विधानसभा क्षेत्र 100 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं का गढ़ है और इसकी जीवनरेखा बूढ़ी गंडक नदी है, जो यहां से लगभग 14 किलोमीटर दूर बहती है। ये नदी इस पूरे क्षेत्र की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को पोषित करती है। यहां के किसान मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती करते हैं। इसके अलावा, आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों की पैदावार भी किसानों की आय का एक अहम जरिया है। सरायरंजन अपने आस-पास के गांवों के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि उपज व्यापार केंद्र के रूप में काम करता है, जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी व्यवसाय भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये क्षेत्र चारों ओर से अन्य प्रमुख कस्बों और शहरों से घिरा हुआ है, जिसमें विद्यापति नगर (10 किमी), दलसिंहसराय (15 किमी), जबकि दरभंगा (45 किमी), मुजफ्फरपुर (65 किमी) और राजधानी पटना (73 किमी) शामिल हैं।

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