बक्सर: बिहार के राजद सांसद सुधाकर सिंह ने गुटखा और पान मसाला पर उपकर लगाने के बजाय उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है । उन्होंने कहा कि प्रस्तावित स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025, जिसका उद्देश्य युवा कल्याण के नाम पर गुटखा और पान मसाला पर कर लगाना है, सामाजिक और वित्तीय स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस विधेयक के तहत, सरकार तंबाकू और पान मसाला जैसी तथाकथित पाप वस्तुओं पर उपकर लगाकर एक जन स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा कोष बनाने की योजना बना रही है।
इसका घोषित उद्देश्य इन उत्पादों को, खासकर नाबालिगों के लिए, महंगा बनाकर इनकी खपत पर अंकुश लगाना है। गुरुवार को लोकसभा में यह मामला उठाते हुए सुधाकर सिंह ने पूछा, ‘क्या गुटखा और पान मसाला पर उपकर लगाने से लोगों का स्वास्थ्य सचमुच सुधरेगा?’ उन्होंने तर्क दिया कि अगर सरकार वाकई जनता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है, तो सिर्फ कर बढ़ाने से काम नहीं चलेगा; बल्कि इन हानिकारक उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।
उनके अनुसार, यह उपकर एक ईमानदार स्वास्थ्य पहल नहीं, बल्कि नागरिकों से राजस्व ऐंठने का एक नया तरीका है।’ सुधाकर सिंह ने आगे आरोप लगाया कि विधेयक में राष्ट्रीय सुरक्षा शब्द जोड़ना राजस्व संबंधी जानकारी को जनता से छिपाने का एक प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि विधेयक के पीछे मुख्य उद्देश्य राजस्व सृजन है, न कि स्वास्थ्य सुरक्षा। उन्होंने मांग की कि विधेयक को विस्तृत जांच के लिए एक प्रवर समिति के पास भेजा जाए, और इस बात पर जोर दिया कि जनहित और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।







