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सीट चाहे किसी की हो, जीत भूमिहारों की पक्की — हर दल में दिखा दबदबा

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Regardless of who holds the seat, Bhumihars are certain to win – they have dominance in every party.

पटनाइस बिहार विधानसभा चुनाव को कई बातों के लिए आगे भी याद किया जाएगा। शायद ये तीन दशक बाद पहला चुनाव है, जिसमें कांग्रेस और राजद में आपस में ही तलवार खिंच गई। वो भी ऐसी कि 5 से 6 सीटों पर एक दूसरे के खिलाफ ही ताल ठोक दी। तेजस्वी यादव हों या नीतीश कुमार या फिर बीजेपी, सबने इस दफे एक समय हाशिए पर चली गई जाति को लिस्ट में बखूबी जगह दी है। जातीय समीकरण के बीच, चाहे NDA हो या महागठबंधन, टिकट का ऐसा बंटवारा हुआ कि हारे कोई भी पार्टी लेकिन जीतेगी एक जाति विशेष ही। ऐसा ही कुछ भूमिहार जाति के साथ है। वो जाति जो हाल की जनगणना में वैसे तो कम दिखती है, लेकिन सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाती है। बिहार में इस दफा कुछ सीटें ऐसी हैं जहां NDA और महागठबंधन दोनों ने ही भूमिहार कैंडिडेट को ही मैदान में उतार दिया है। एकाध सीटों पर तो भूमिहार बाहुबली ही एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। नीचे पढ़िए कौन-कौन सी हैं वो सीटें। मोकामा विधानसभा सीट अपने अस्तित्व में आने के कुछ चुनावों के बाद से ही चर्चा में आ गई।

कभी दिलीप सिंह, तो कभी सूरज भान सिंह इस सीट से विधायक बने। लेकिन बाद में दिलीप सिंह के गुजरने के बाद कमान उनके छोटे भाई अनंत सिंह के हाथ में आ गई। उन्होंने राजद को छोड़ जदयू को चुना और इस सीट से विधायक बन गए। AK 47 और हैंड ग्रेनेड कांड में निचली अदालत से सजा के बाद विधायिकी गई तो पत्नी नीलम सिंह विधायक बन गईं। उसी केस में हाईकोर्ट से बरी होने के बाद अनंत सिंह फिर से मैदान में आ गए हैं। लेकिन इस बार महागठबंधन ने उनके खिलाफ बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को टिकट दे दिया है। वो राजद के सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। दोनों ही कैंडिटेट भूमिहार हैं। नीतू देवी (कांग्रेस) पूर्व मद्य निषेद्य मंत्री आदित्य सिंह की बड़ी बहू हैं। इनका पैतृक गांव नवादा के नरहट में है। हालांकि आदित्य सिंह शुरू से कांग्रेसी रहे और इसी वजह से बिहार की लालू-राबड़ी सरकार में कांग्रेस के कोटे से मंत्री भी रहे। इसके बाद कमान उनकी बड़ी बहू नीतू सिंह ने संभाल ली। नीतू सिंह पिछली बार 2020 के चुनाव में हिसुआ की विधायक चुनी गई थीं। ये भूमिहार जाति की हैं।

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इनके मुकाबले में BJP ने अनिल सिंह को टिकट दिया है। अनिल सिंह पहले भी विधायक रह चुके हैं। अनिल सिंह छात्र जीवन में ही संघ से जुड़ गए थे। इसके बाद ABVP में रहे। ये भी जाति से भूमिहार हैं। पटना की बिक्रम विधानसभा सीट की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं। पिछले दो टर्म यानी 2015 और 2020 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर मशहूर डॉक्टर दिवंगत उत्पल कांत के बेटे सिद्धार्थ सौरव ने जीत दर्ज की। हालांकि 2024 में नीतीश कुमार की NDA सरकार को समर्थन देने के लिए इन्होंने पाला बदल लिया। इस बार ये बीजेपी के टिकट पर मैदान से हैं। वहीं इनके मुकाबले पहले भी विधायक रह चुके अनिल कुमार को कांग्रेस ने टिकट दिया है। ये दोनों ही जाति से भूमिहार हैं। बेगूसराय की मटिहानी विधानसभा सीट भी इसी तरह से समीकरण से लहालहोट है। यहां कभी जदयू के विधायक रहे नरेंद्र सिंह उर्फ बोगो सिंह मैदान में हैं। बोगो सिंह ने जदयू छोड़ राजद जॉइन कर लिया और वहीं से विधानसभा चुनाव का टिकट भी लिया। जबकि उनके विरोधी राज कुमार सिंह हैं जो जदयू के टिकट से मैदान में हैं। राज कुमार सिंह ने 2020 का विधानसभा चुनाव चिराग पासवान की पार्टी लोजपा से लड़ा था और जीत भी गए थे। हालांकि इसके फौरन बाद वो जदयू में शामिल हो गए। ये दोनों उम्मीदवार भी भूमिहार जाति के ही हैं।

खगड़िया जिले की परबत्ता सीट की भी यही कहानी है। यहां से RJD के टिकट पर कभी जदयू के विधायक रहे डॉक्टर संजीव कुमार मैदान में हैं। पिछली बार 2020 में भी ये जदयू के टिकट पर ही विधायक बने थे। ये पेशे से भी डॉक्टर ही हैं। वहीं इनसे मुकाबला करने के लिए चिराग पासवान की लोजपा रामविलास ने बाबूलाल शौर्य को मैदान में उतारा है। ये दोनों प्रमुख उम्मीदवार भी भूमिहार जाति के ही हैं। शेखपुरा जिले की बरबीघा सीट पर JDU के कुमार पुष्पंजय का मुकाबला कांग्रेस के त्रिशूलधारी सिंह से है। दोनों ही संपन्न घरों से आते हैं। इस सीट पर भी इन्हीं दोनों के बीच प्रमुख मुकाबला है। अब संयोग देखिए कि ये दोनों उम्मीदवार ही भूमिहार जाति से हैं। अब सवाल ये उठता है कि NDA तो भूमिहारों को टिकट देती आई है। इसका इतिहास भी है, लेकिन महागठबंधन से टिकट का मौका कम भूमिहारों को ही नसीब हुआ है। ऐसे में इन 6 सीटों पर भूमिहार बनाम भूमिहार की लड़ाई ही क्यों है? इसका जवाब है वोटबैंक। दरअसल ये सभी सीटें भूमिहार बाहुल्य हैं। इन सीटों पर भूमिहार वोटर ही उम्मीदवारों की हार और जीत तय करते हैं। तो ये साफ तौर पर मान लीजिए, कि हारे चाहे महागठबंधन या NDA, इन 6 सीटों पर जीतेगा एक भूमिहार ही।

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