पटना: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को वर्ष 2026 में पार्टी के भीतर कोई बड़ी और अहम जिम्मेदारी मिलने की सुगबुगाहट ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस नेताओं के बयान से एक ओर जहां प्रियंका को बड़ी भूमिका देने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राहुल गांधी की ‘विफलता’ के रूप में पेश कर रहा है। आइए जानते हैं। प्रियंका गांधी फिलहाल बिना किसी विशिष्ट पोर्टफोलियो के महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनसे यूपी प्रभारी का पद वापस ले लिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, अब उन्हें किसी एक राज्य तक सीमित रखने के बजाय ‘कैंपेन कमेटी प्रमुख’ या ‘इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी’ जैसा कोई नया और प्रभावशाली पद दिया जा सकता है। इस बीच, प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा और यूपी से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को हवा दे दी है। जहां मसूद ने उन्हें पीएम पद का दावेदार बताया, वहीं वाड्रा ने कहा कि जनता की ओर से प्रियंका को बड़ी भूमिका में देखने की मांग लगातार बढ़ रही है। रॉबर्ट वाड्रा के बयान को राजनीतिक जानकार कांग्रेस अध्यक्ष पद की ओर इशारे के रूप में देख रहे हैं। वाड्रा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर कड़े सवाल उठाए हैं।
कुशवाहा ने कहा, ‘रॉबर्ट वाड्रा जिस तरह प्रियंका गांधी को आगे लाने की बात कह रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि अब खुद कांग्रेस को ही राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा।’ कुशवाहा ने आगे तंज कसते हुए कहा कि प्रियंका हों या राहुल, कांग्रेस का कोई भी नेता अभी वर्षों तक प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है और आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी। राहुल गांधी के बर्लिन में भारतीय संस्थानों की आलोचना किए जाने पर भी उपेंद्र कुशवाहा ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी को यह बात कब समझ आएगी कि देश की बात देश में ही की जानी चाहिए। विदेश में जाकर अपने ही सिस्टम की आलोचना करना आपत्तिजनक है।’ कुशवाहा ने कहा कि जनता ने पहले भी उनकी ऐसी बातों का जवाब दिया है और आगे भी उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा।







