Home बिहार गंगा की लहरों पर परिवहन क्रांति की इबारत लिखने की तैयारी

गंगा की लहरों पर परिवहन क्रांति की इबारत लिखने की तैयारी

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Preparations underway to write the story of a transport revolution on the waves of the Ganga.

कोच्चि के तर्ज पर बिहार में वाटर मेट्रो बन सकती है परिवहन की नयी रीढ़

रिपोर्ट: मनोज कुमार

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कोच्चि/पटना। पटना की पहचान रही गंगा अब सिर्फ आस्था और संस्कृति की नदी नहीं रहेगी, बल्कि राजधानी के यातायात का आधुनिक माध्यम भी बनेगी। कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर पटना में राज्य की पहली वाटर मेट्रो परियोजना शुरू करने की दिशा में ठोस पहल हो चुकी है। गंगा के 10 प्रमुख घाटों को जोड़ने वाली इस योजना से न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि शहरी परिवहन, पर्यटन और नदी आधारित अर्थव्यवस्था को भी नयी मजबूती मिलेगी। बिहार की पहचान सदियों से उसकी नदियों से रही है, लेकिन अब यही नदियां राज्य के आधुनिक परिवहन तंत्र की रीढ़ बनने की ओर बढ़ सकती हैं। केरल में सफलतापूर्वक संचालित हो रही कोच्चि वाटर मेट्रो परियोजना ने बिहार सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। राज्य सरकार जल-आधारित शहरी परिवहन प्रणाली को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है और इसे भविष्य की परिवहन क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।

कोच्चि मॉडल की वाटर मेट्रो ने कम समय में यात्रियों का भरोसा जीता है। आधुनिक जेटी, समयबद्ध सेवा, सुरक्षित और प्रदूषण-रहित नौकाओं ने इसे आम लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया है। इसी अनुभव को आधार बनाकर बिहार में भी गंगा समेत अन्य प्रमुख नदियों पर ऐसी व्यवस्था लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। खासतौर पर पटना जैसे शहर, जहां सड़क यातायात पर अत्यधिक दबाव है, वहां वाटर मेट्रो एक प्रभावी विकल्प बन सकती है। कोच्चि वाटर मेट्रो रेल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर लोकेश बहेरा का कहना है कि पटना के लिए तैयार की गयी योजना पूरी तरह व्यवहारिक है। उन्होंने कहा, कोच्चि में वाटर मेट्रो ने शहरी परिवहन की तस्वीर बदली है। पटना में भी नदी की चौड़ाई, यात्री मांग और शहर की जरूरतों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार की गयी है। यदि राज्य सरकार इसे लागू करती है, तो यह परियोजना परिवहन के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नये अवसर पैदा करेगी।

प्रस्तावित महत्वाकांक्षी योजना के तहत राजधानी में गंगा के 10 प्रमुख घाटों पर आधुनिक वाटर मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे राजधानी की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी और यात्रियों का समय व खर्च—दोनों घटेंगे। कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड ने पटना वाटर मेट्रो की फिजिबिलिटी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 45 किलोमीटर लंबे जल मार्ग पर वाटर मेट्रो का संचालन संभव है, जिस पर लगभग 769 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आयेगी। यह परियोजना राज्य की पहली संगठित और आधुनिक नदी आधारित शहरी परिवहन प्रणाली होगी। प्रस्तावित योजना के तहत कंगन घाट, गांधी घाट, गाय घाट, दीघा घाट, काली घाट समेत कुल 10 घाटों को आपस में जोड़ा जायेगा। इसका सीधा फायदा गंगा के दोनों किनारों पर बसे इलाकों को मिलेगा। अभी जिन स्थानों तक सड़क से पहुंचने में एक घंटा या उससे अधिक समय लगता है, वही दूरी वाटर मेट्रो से 10–15 मिनट में तय की जा सकेगी।

बिहार में जल परिवहन की संभावनाएं नयी नहीं हैं, बल्कि आवश्यकता के अभाव में यह क्षेत्र अब तक उपेक्षित रहा है। गंगा, सोन, गंडक और कोसी के किनारे बसे शहरों और कस्बों को यदि आधुनिक जेटी और नियमित जल परिवहन से जोड़ा जाये, तो लोगों की दैनिक आवाजाही कहीं अधिक सुगम हो सकती है। इससे सड़क जाम, ईंधन की खपत और प्रदूषण जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। वाटर मेट्रो के सामाजिक और आर्थिक लाभ भी कम नहीं हैं। एक ओर जहां यह सस्ती और सुलभ यात्रा का माध्यम बनेगी, वहीं दूसरी ओर पर्यटन को नया आयाम देगी। धार्मिक घाट, ऐतिहासिक स्थल और सांस्कृतिक केंद्र जल मार्ग से जुड़ने पर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और आकर्षक बन सकते हैं। साथ ही, नाव संचालन, रखरखाव, टिकटिंग और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सरकार यदि चरणबद्ध तरीके से इस योजना को आगे बढ़ाती है, तो अपेक्षाकृत कम लागत में बड़ा लाभ हासिल किया जा सकता है। वाटर मेट्रो न केवल परिवहन का विकल्प होगी, बल्कि यह बिहार की नदी-आधारित संस्कृति को आधुनिक विकास से जोड़ने का माध्यम भी बनेगी। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो निस्संदेह बिहार देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल होगा, जहां नदियां विकास की धारा बनकर बहेंगी। यदि पटना में यह प्रयोग सफल होता है, तो भागलपुर, मुंगेर, छपरा, आरा और बक्सर जैसे अन्य गंगा तटीय शहरों में भी वाटर मेट्रो की संभावनाएं खुल सकती हैं। यह परियोजना गंगा को आस्था के साथ-साथ विकास की धुरी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।

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