पटना: बिहार में एनडीए सरकार के गठन के लगभग दो महीने बाद पहला मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार 14 जनवरी के बाद कभी भी हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान चर्चा हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार के तहत कुल 9 नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। इनमें से 6 मंत्री जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे से और 3 मंत्री भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से शामिल किए जाने की संभावना है।
वर्तमान में नीतीश कुमार सहित जदयू के 9 मंत्री, जबकि बीजेपी के 14 मंत्री हैं, जिनमें दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी शामिल हैं। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) से 2 और हम (सेक्युलर) व आरएलपी से एक-एक मंत्री मंत्रिमंडल में हैं। जदयू कोटे से वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी चार और बिजेंद्र यादव पांच विभाग संभाल रहे हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि विभागों के बोझ को कम करने और संगठनात्मक संतुलन के लिए नए चेहरों को मंत्रिमंडल में लाना जरूरी है।
हालांकि, अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही लेंगे। पार्टी का फोकस उन अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर भी है, जिन्हें अब तक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई है। बीजेपी की ओर से राज्य मंत्री नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। वे फिलहाल दो मंत्रालय संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नए चेहरों को मौका देने के साथ-साथ उम्र और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर अपने तीन मंत्रियों का चयन करेगी। बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद मंत्रियों की कुल संख्या 35 तक पहुंच जाएगी, यानी सरकार लगभग पूर्ण मंत्रिमंडल के साथ काम करेगी।







