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प्रशांत किशोर का दावा: चुनाव से पहले या बाद में किसी से गठबंधन नहीं, जन सुराज जीतेगा 50 सीटें

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Prashant Kishor claims: No alliance with anyone before or after the elections, Jan Suraj will win 50 seats

पटना: जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने पटना में आयोजित एक निजी चैनल के ‘बिहार पावर प्ले’ कॉन्क्लेव में दावा किया कि उनकी पार्टी ने बिहार चुनाव से पहले किसी अन्य दल से गठबंधन नहीं किया है और न ही चुनाव के बाद किसी के साथ गठबंधन करेगी। प्रशांत किशोर ने यह बात लिखित में देने की भी पेशकश की। पीके ने कहा कि जन सुराज को जनता ने विकल्प के रूप में देखा है। लेकिन वोट देने के लिए लोगों को अपनी ‘आस्था’ को छोड़कर छलांग लगानी होगी। अपने पहले ही चुनाव में जन सुराज कितनी सीटें जीत सकती है, इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने दो संभावित परिणाम बताए। उन्होंने कहा, ‘मुझे दो संभावनाएं दिखती हैं। लोगों ने जन सुराज को एक विकल्प के रूप में देखा है, लेकिन वोट देने के लिए ‘लीप ऑफ फेथ’ (विश्वास की छलांग) की जरूरत होती है। निराशा के लंबे दौर के कारण लोगों को इसकी जरूरत है।’

उन्होंने आगे कहा कि जन सुराज या तो 10 से कम सीटें जीतेगी या फिर 150 से अधिक सीटें। यह पूछे जाने पर कि अगर जन सुराज चुनाव के बाद ‘किंगमेकर’ बनकर उभरती है, तो क्या वह अन्य दलों के साथ गठबंधन करेंगे, इस पर प्रशांत किशोर ने स्पष्ट जवाब दिया, ‘हम इधर या उधर की राजनीति नहीं करते। यदि लोग हमें जनादेश नहीं देते हैं, तो हम अपना काम जारी रखेंगे। मैं आपको लिखित में दे सकता हूं, न चुनाव से पहले गठबंधन, न चुनाव के बाद।’ हालांकि, उन्होंने ‘त्रिशंकु विधानसभा’ की स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘यदि ऐसी स्थिति आती है जब हमारे बिना सरकार नहीं बन सकती, तो मुझे पता है कि लोग (विधायक) पाला बदल लेंगे। मैं उन्हें रोक नहीं पाऊंगा।’ प्रशांत किशोर ने इसके लिए ‘लक्ष्मी (पैसे) के लालच और (केंद्रीय एजेंसी) सीबीआई के डर’ को जिम्मेदार ठहराया। प्रशांत किशोर ने अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी पर हॉर्स-ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया।

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उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए जन सुराज के 30 विधायक हैं और ये 30 विधायक सरकार गठन की कुंजी हैं, तो क्या विधायक मेरी बात मानेंगे? लेकिन मैं कह सकता हूं कि मैं अभी भी ईमानदार रहूंगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अमित शाह से भी यह लिखित में ले लीजिए कि अगर NDA बहुमत से पीछे रह जाता है, तो किसी भी विधायक को खरीदा नहीं जाएगा या उन पर दबाव नहीं डाला जाएगा। आप पूछ रहे हैं कि क्या हम नहीं बिकेंगे, उनसे पूछिए जो खरीदेंगे।’ अपने पुराने अनुभव, खुद चुनाव लड़ने और दूसरों को चुनाव लड़ाने के बीच के अंतर के बारे में पूछे जाने पर किशोर ने कहा, ‘यहां भी मैं दूसरों को चुनाव लड़वा रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि इसे अंजाम देने के लिए मैंने एक नया संगठन बनाया है। पहले, मैं तैयार संगठनों के साथ काम करता था।’ वहीं अरविंद केजरीवाल से तुलना पर किशोर ने कहा कि ‘हम दोनों की राजनीति अलग है। केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया था जो मुख्यमंत्री थीं, लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री चुनाव नहीं लड़ रहे। अगर मैं राघोपुर से तेजस्वी के खिलाफ लड़ता, तो लोग कहते कि मैं पिछड़े वर्ग के नेता के खिलाफ हूं।’


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