पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) को लेकर राज्य की सियासत और छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। टीआरई-4 का विज्ञापन जारी नहीं होने से नाराज शिक्षक अभ्यर्थियों ने अब सड़क पर उतरने का ऐलान कर दिया है। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में 16 फरवरी को पटना में बड़े आंदोलन की घोषणा की गई है। उन्होंने राज्य भर से शिक्षक अभ्यर्थियों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
दिलीप कुमार ने नीतीश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले टीआरई-4 की विज्ञप्ति जल्द जारी करने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं ट्वीट कर टीआरई-4 को लेकर भरोसा दिलाया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विज्ञापन और परीक्षा की संभावित तारीखों की घोषणा की थी। छात्र नेता ने कहा कि हालिया चुनाव में नीतीश सरकार को प्रचंड बहुमत मिला और नई सरकार का गठन हुए साढ़े तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक बीपीएससी टीआरई-4 का विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।
इससे लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। दिलीप कुमार ने यह भी कहा कि सरकार बजट में एक करोड़ नौकरी और रोजगार की बात कर रही है और दावा किया जा रहा है कि देश में सबसे ज्यादा नौकरियां बिहार में मिल रही हैं, लेकिन जमीन पर शिक्षक भर्ती को लेकर स्थिति बिल्कुल उलट है। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर भरोसा न होने की बात कहते हुए कहा कि सरकार को अपने वादों पर अमल करना चाहिए। टीआरई-4 को लेकर जारी असमंजस के बीच 16 फरवरी को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर पटना में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर भी नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन से पहले कोई ठोस फैसला लेकर अभ्यर्थियों को राहत देती है या फिर मामला और तूल पकड़ता है।







