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सिवान में सियासी जंग: 6 बार के MLA बनाम मंत्री का डेब्यू, दिलचस्प मुकाबला

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Political battle in Siwan: Six-time MLA vs. debut minister, a fascinating contest

सिवानः बिहार में सिवान विधानसभा दो दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर का गवाह बनने जा रहा है। काफी कम मतों से जीत हार का गवाह बनता सिवान इस बार एक नए सामाजिक समीकरण के साथ लड़ा जा रहा है। पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों के बीच जीत हार के समीकरण से अलग हटकर इस बार बीजेपी ने सिवान से सवर्ण उम्मीदवार मंगल पांडेय को उतारा है। वहीं राजद ने अपने पुराने पहलवान अवध बिहारी चौधरी को चुनावी रण में आजमाया है। उम्मीदवारों के बदले सोशल इंजीनियरिंग से क्या बदलेगा सिवान की तस्वीर? जानते हैं सिवान में धड़कते चुनावी नब्ज को। सिवान की जंग में इस बार दो धुरंधर शामिल हैं। एनडीए ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को उतारा है तो महागठबंधन की तरफ से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सिवान विधानसभा से चुनावी जंग का डेब्यू कर रहे हैं। यह दीगर कि हिमाचल और पश्चिम बंगाल का प्रभारी रह कर विधानसभा का चुनाव लड़वाने का मौका मिला है। सुशील कुमार मोदी के लिए चुनाव प्रभारी के रूप में कुम्हरार विधानसभा से चुनाव लड़ने का भी अनुभव प्राप्त है। दूसरी तरफ राजद के अवध बिहारी चौधरी भी कम धुरंधर नहीं। विभिन्न दलों से सिवान विधानसभा की जंग जीतते रहे हैं।

सिवान से ये कुल छह बार विधायक रहे हैं। वर्ष 1985 में जनता पार्टी, 1990,1995 जनता दल और 2000,2005,2020 का विधानसभा चुनाव राजद से जीतते रहे हैं। सिवान की राजनीति में उलटफेर चलता रहा है। 1985 के बाद यहां की राजनीति राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के इर्द गिर्द घूमती रही।1985 से 2005(नवंबर) तक राजद के अवध बिहारी चौधरी जीत दर्ज कराते रहे। वर्ष 2005 फरवरी के बाद बीजेपी के व्यास देव ने जीत का नया समीकरण सेट किया और इसे वर्ष 2010,2015 तक लगातार जारी रखा। वर्ष 2020 में फिर राजद की वापसी हुई और अवध बिहारी चौधरी विधायक बने। वर्ष 1962 में जनसंघ से जनार्दन तिवारी ने पहली बार जनसंघ के टिकट पर जीत दर्ज की। फिर 1969, 1972 और 1980 का विधानसभा चुनाव भी जनार्दन तिवारी ने जीती। बहुत दिनों के बाद सिवान विधानसभा की जंग में ब्राह्मण उम्मीदवार मंगल पांडेय को भाजपा ने आजमाया है। बिहार के अन्य सीटों की तरह ही बीजेपी ने सिवान से विद्रोहियों की नाराजगी को साधने का काम सबसे पहले किया। एमएलसी रहे मनोज सिंह प्रारम्भ में जो चुनाव में उतरने की जिद्द कर बैठे थे उन्हें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मना लिया और वे सिवान के भाजपा प्रत्याशी मंगल पांडेय के साथ वोट मांग रहे हैं।

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थोड़ी नाराजगी पूर्व विधायक व्यास देव के परिवार में भी थी। उनके पुत्र चुनाव लड़ना चाहते थे, अब वे भी मंगल पांडेय के साथ वोट मांग रहे हैं। बीजेपी यू तो सबका साथ सबका विकास के नारों के साथ वोट मांगती है। फिर सिवान में बीजेपी के आधार मत अतिपिछड़ा,सवर्ण, वैश्य और कोयरी का है। राजद का आधार समीकरण एमवाई यानी मुस्लिम और यादव है। जातीय मतों के गणित की बात करें तो मुस्लिम के 50 हजार और यादव के 30 हजार राजद की मूल ताकत है। बीजेपी के सोशल इंजीनियरिंग सवर्ण के 25 हजार, वैश्य के 70 हजार के अलावा साथी दल जदयू के कुर्मी-कोयरी के अलावा नोनिया जाति का भी साथ है। सिवान की राजनीति में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रवेश से हिंदुत्व का जागरण अभियान शुरू हो गया। योगी आदित्यनाथ के संदेश के विपरीत प्रतिक्रिया के कारण मुस्लिम भी गोलबंदी की और बढ़ गए। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सत्ता में लौटने पर प्रदेश से ‘माफिया का अंत’ उसी तरह होगा, जैसे उनके राज्य में हुआ है। ‘एनडीए बोलता कम और काम ज्यादा करता है। उत्तर प्रदेश में अब दंगा नहीं, सब चंगा है। पहले ही चेतावनी दे दी जाती है, दंगा करोगे तो खुद तो ‘जहन्नुम’ में जाओगे, भीख भी नहीं मिलेगी। ये राष्ट्रीय जनता दल (राजद ) ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विरासत का अपमान किया है। राम रथ यात्रा के दौरान भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया था। सिवान विधानसभा चुनाव 2025 का टर्निंग प्वाइंट हैं एआईएमआईएम के प्रत्याशी शमशीर और जन सुराज के उम्मीदवार इंतिखाब अहमद। ये चुनाव में जितने मजबूत बन कर उभरेंगे इस राजद उम्मीदवार को उतना ही नुकसान होगा।

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