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पूर्णिया से सीमांचल की 24 सीटों पर पीएम मोदी की नजर, NDA की खास रणनीति

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PM Modi's eyes on 24 seats from Purnia to Seemanchal, NDA's special strategy

पूर्णिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्णिया में होंगे। पीएम मोदी पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। साथ ही बिहार को 40 हजार करोड़ रुपये की सौगात भी देंगे। पीएम मोदी का पूर्णिया दौरा सिर्फ योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि 2025 के चुनावी अभियान की एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है। माना जाता है कि सीमांचल की 24 सीटें जिस पार्टी की झोली में जाएंगी, सत्ता की कुर्सी उसी के करीब मानी जा रही है। यही वजह है कि इस बार बिहार की सियासत का सबसे बड़े ‘खेल’ की शुरुआत पूर्णिया से होगी। बिहार के सीमांचल में चार जिले कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज आता है। माना जाता है कि इन जिलों की कुल 24 विधानसभा सीटें हर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

सीमांचल में बीजेपी की राह कभी आसान नहीं रहती है, फिर चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का। सीमांचल में बीजेपी अपनी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती है। 2015 विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें राजद को 9, जेडीयू को 5 और कांग्रेस को भी 5 सीटें मिली थीं। बीजेपी सीमांचल मे केवल 5 सीटों तक ही सिमट गई थी। 2020 विधानसभा चुनाव: इस चुनाव में बीजेपी ने पिछली बार से तीन सीटें ज्यादा जीती थीं। बीजेपी ने कुल 8 सीटें जीती थीं। इसकी एक वजह नीतीश कुमार का बीजेपी का साथ होना बताया गया। जबकि कांग्रेस को 5, जेडीयू को 4, और आरजेडी को 1 सीट मिली थी। एआईएमआईएम ने 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया, हालांकि बाद में उसके चार विधायक राजद में शामिल हो गए।

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2024 लोकसभा चुनाव: एक साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में भी एनडीए को सीमांचल की 4 लोकसभा सीटों में से सिर्फ अररिया सीट पर ही जीत मिली थी। किशनगंज और कटिहार कांग्रेस के खाते में गईं, जबकि पूर्णिया की सीट निर्दलीय प्रत्याशी पप्पू यादव ने जीती थी। सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटों की दिशा ही चुनाव का रुख तय करती है। किशनगंज में 68 फीसदी, अररिया में 43 फीसदी, कटिहार में 45 फीसदी और पूर्णिया मे 39 प्रतिशत मुस्लिम है। इस क्षेत्र में लंबे समय से कांग्रेस और राजद की मजबूत पकड़ रही है। लेकिन, 2020 के चुनाव में एआईएमआईएम की एंट्री ने समीकरण बदल दिए। ओवैसी की पार्टी ने मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण किया, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ भाजपा को मिला।

इस बार भी एआईएमआईएम ने अकेले लड़ने का संकेत दिया है, जिससे मुस्लिम वोटों का संभावित बंटवारा हो सकता है। यह स्थिति भाजपा और एनडीए के लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है, जो महागठबंधन के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। बीजेपी जानती है कि मुस्लिम वोट बैंक उसके पक्ष में नहीं आएगा, इसलिए वह दलितों, अति पिछड़े वर्गों (EBC) और प्रवासी मजदूरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का गृह जिला किशनगंज है, जिससे पार्टी इस क्षेत्र में विशेष मेहनत कर रही है। जेडीयू भी इस रणनीति का हिस्सा है और एनडीए मिलकर सीमांचल में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की पूर्णिया रैली से एनडीए अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेगा। इस रैली पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यहाँ से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के हमलों का जवाब भी दिया जा सकता है।

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