पटना: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि छात्रा के साथ गंभीर घटना हुई थी, लेकिन यह आत्महत्या थी या हत्या—इसका अंतिम सच अभी सामने आना बाकी है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय थानाध्यक्ष, एएसपी, एसपी, एसएसपी कार्तिकेय कुमार और प्रभात अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत से ही मामले को गलत दिशा देने की कोशिश की, इसलिए उन्हें भी अभियुक्त बनाया जाना चाहिए।
शुरुआती बयान में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था और दुष्कर्म की आशंका से साफ इनकार किया था। एसएसपी ने कहा था कि छात्रा के साथ शारीरिक प्रताड़ना के प्रमाण नहीं मिले हैं, जबकि कमरे से नींद की गोलियां बरामद होने की बात जरूर कही गई थी। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की थ्योरी कमजोर पड़ गई और आनन-फानन में हॉस्टल मालिक मनीष राज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। परिजनों का कहना है कि असली जिम्मेदार हॉस्टल संचालक नीलम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल और उनके पुत्र अंशु अग्रवाल से अब तक सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं हुई।
पुलिस अब तीन प्रमुख थ्योरी पर जांच आगे बढ़ा रही है। पहली, पटना आने से पहले छात्रा की मानसिक और शारीरिक स्थिति कैसी थी। दूसरी, पटना पहुंचने के बाद क्या वह किसी अन्य व्यक्ति से मिली और किन स्थानों पर गई। तीसरी, यदि वह सामान्य हालत में हॉस्टल लौटी तो क्या घटना हॉस्टल के भीतर ही हुई। इन बिंदुओं की पड़ताल के लिए सीडीआर, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिलीटेड डेटा की बारीकी से जांच की जा रही है।
पुलिस का दावा है कि जांच अंतिम चरण में है और सिर्फ एक ठोस प्रमाण मिलते ही पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा। वहीं परिजनों और आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक असली दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय संभव नहीं है। इस हाईप्रोफाइल मामले पर पूरे बिहार की नजर टिकी हुई है।







