
पटना: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक में बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों का ब्योरा साझा किया। केंद्र सरकार ने देशभर के उन 100 जिलों की पहचान की है जहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने के लिए इन्हें ‘जीरो फैटेलिटी’ जिले घोषित किया गया है। बिहार सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। सरकार की कोशिश है कि जागरुकता अभियानों के जरिए इन दुर्घटनाओं को रोकने की कोशिश की जा सके। 1 से 31 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में रैली, मैराथन और सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
- समीक्षा बैठकें: वर्ष 2025 में सड़क सुरक्षा को लेकर कुल 484 बैठकें की गईं, जिसमें डीएम और एसपी स्तर पर दुर्घटना के कारणों की समीक्षा की गई।
- ब्लैक स्पॉट में सुधार: पिछले तीन वर्षों में एनएचएआई (NHAI) और पथ निर्माण विभाग द्वारा चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स की संख्या में लगातार कमी आई है। इन खतरनाक मोड़ों और स्थानों पर साइन बोर्ड, सड़क चौड़ीकरण और बैरिकेडिंग का काम तेज कर दिया गया है।
सड़क हादसे के बाद पीड़ितों को तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए एंबुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
- त्वरित रिस्पांस: वर्तमान में 102 नंबर पर कॉल करने पर एंबुलेंस शहरी क्षेत्रों में 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर पहुंच रही है।
- मैपिंग: 1500 सरकारी एंबुलेंस की मैपिंग हो चुकी है, जबकि 2000 निजी एंबुलेंस को भी इस सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद और उपचार की व्यवस्था को आसान बनाया है।
| योजना | सहायता राशि | स्थिति |
| हिट एंड रन (मृत्यु) | 2,00,000 रुपये | 73% मामलों में भुगतान पूर्ण |
| हिट एंड रन (घायल) | 50,000 रुपये | आवेदन प्रक्रिया जारी |
| कैशलेस उपचार | 1,50,000 रुपयों तक | दुर्घटना के शुरुआती 7 दिनों तक |
| गुड सेमेरिटन (मददगार) | 25,000 रुपयों का इनाम | गोल्डन ऑवर में मदद करने वाले को |






