
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण हमेशा से ही सियासी महासंग्राम का केंद्र रहा है। इस बार भी, पहले चरण की 121 सीटें न केवल दो प्रमुख गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन के लिए, बल्कि पहली बार लड़ाई में उतरे जनसुराज के लिए भी निर्णायक महत्व रखती हैं। सबसे बड़ी बात ये कि बूिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इन 121 सीटों में से महागठबंधन ने 61 जीते थे तो NDA ने 59। यूं समझिए कि पहले चरण का नतीजा काफी कुछ तय कर देगा। पिछले चुनाव (2020) में इन 121 सीटों पर दोनों गठबंधनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन को 61 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए 59 सीटों पर चुनाव जीत सका था। एक सीट लोजपा के खाते में गई थी, जिसके विधायक बाद में जदयू में शामिल हो गए थे।पिछली बार, दोनों गठबंधनों के वोटों में महज कुछ हजार का अंतर रह गया था, और यही करीबी अंतर महागठबंधन को सरकार बनाने से 12 सीटों से पीछे छोड़ गया था। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 पर बात करने से पहले आपको 2020 के वो नतीजे भी देखने होंगे, जिसमें इस बार पहले फेज में रखी गईं 121 सीटों पर चुनाव हुए थे। तब 2020 में RJD ने सबको पीछे छोड़ दिया था और 121 में से 42 सीटें हासिल की थी।
RJD कुल 75 सीटों पर जीती थी, यानी आधी से अधिक सीटों वो थीं जो इस बार पहले फेज में हैं। वहीं बीजेपी ने इन 121 सीटों में से 32 पर जीत हासिल की थी। जबकि जदयू को 23 सीटें मिली थीं। 2020 चुनाव के पहले चरण की बात करें तो उसमें कांग्रेस ने 8 सीटें, लेफ्ट ने 11 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार, दोनों गठबंधनों ने पिछली बार हुई कड़ी टक्कर को अपने पक्ष में आसान बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है।इस बार पहले चरण का खास महत्व है। अगर एनडीए बढ़त बनाता है, तो महागठबंधन के लिए चुनौती होगी, और यदि विपक्षी गठबंधन अधिक सीटें जीतता है, तो एनडीए के सामने सरकार बनाने में चुनौती आएगी।






