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शपथ ग्रहण में बाधा: प्रोटेम स्पीकर ने मनोज विश्वास और आलोक मेहता को रोका

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Oath taking interruption: Pro tem Speaker stops Manoj Vishwas and Alok Mehta

पटना: बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज से कांग्रेस एमएलए मनोज विश्वास जब शपथ ले रहे थे तब उन्होंने कहा- मैं मनोज विश्वास ईश्वर की शपथ लेता हूं और सत्य निष्ठा से….। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने उन्हें रोका और कहा कि आप सिर्फ एक नाम ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर कहिए या तो सत्य निष्ठा। इसके बाद मनोज विश्वास ने करेक्शन कर शपथ ली। बिहार विधानसभा के नए सत्र के दौरान विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह में एक छोटा, लेकिन ये एक महत्वपूर्ण वाक्या हुआ, जिसने तुरंत सबका ध्यान खींचा। कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास को उनके शपथ लेने के तरीके के कारण प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव द्वारा बीच में ही रोका गया, जिसके बाद उन्हें अपनी शपथ में सुधार करना पड़ा। जब कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास शपथ लेने के लिए खड़े हुए, तो उन्होंने शुरुआत में कहा, “मैं मनोज विश्वास ईश्वर की शपथ लेता हूं और सत्य निष्ठा से…”।

शपथ के संवैधानिक प्रारूप के अनुसार, सदस्य को ‘ईश्वर की शपथ’ या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’ में से केवल एक विकल्प चुनना होता है। इस गलती को भांपते हुए, सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने तुरंत उन्हें रोका। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदस्य एक समय में सिर्फ एक ही नाम ले सकता है। उन्होंने मनोज विश्वास से कहा कि वे या तो “ईश्वर” कहें या “सत्यनिष्ठा”। प्रोटेम स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद, मनोज विश्वास ने तुरंत अपनी गलती को सुधारा और निर्धारित संवैधानिक प्रारूप के तहत अपनी शपथ पूरी की। कुछ इसी तरह की बात आरजेडी विधायक आलोक मेहता के साथ हुई। उन्होंने शपथ लेने के दौरान ईश्वर और सत्यनिष्ठा को दोहराया। उसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने उन्हें टोका। उसके बाद उन्होंने दोबारा सुधारने के बाद शपथ को आगे बढ़ाया। कुल मिलाकर अररिया जिले के फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास और आरजेडी विधायक आलोक मेहता के शपथ ग्रहण के दौरान प्रोटेम स्पीकर ने उन्हें सुधारा। मनोज विश्वास ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज सीट पर कांग्रेस को 35 साल बाद शानदार वापसी दिलाकर इतिहास रच दिया।

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38 वर्षीय मनोज विश्वास ने भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा विधायक विद्यासागर केसरी उर्फ मंजन केसरी को मात्र 221 मतों के बेहद करीबी अंतर से पराजित किया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मनोज विश्वास को 1,20,119 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 1,19,893 मत प्राप्त हुए। उनकी शैक्षिक योग्यता ग्रेजुएट प्रोफेशनल है और उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹1.5 करोड़ है, जिस पर ₹10 लाख की देनदारी है। उन पर दो आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। वह फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के मझुआ पंचायत के निवासी हैं, और उनके पिता हरि विश्वास ने अपने जीवन में फारबिसगंज की सीएफआई में मजदूरी तक का काम किया था, जो उनकी ज़मीनी पृष्ठभूमि को दर्शाता है। मनोज विश्वास का राजनीतिक सफर काफी बदलावों से भरा रहा है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत जेडीयू (JDU) से की थी, जहाँ वह 2013 में शामिल हुए और पार्टी के फारबिसगंज प्रखंड अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया। इसके बाद, उन्होंने 2018 में जेडीयू छोड़कर आरजेडी (RJD) का दामन थाम लिया।

इस दौरान, वह अपनी पंचायत की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे। उनके राजनीतिक कौशल और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी पत्नी अलका देवी लगातार दो बार—2011 और 2016 में—मुखिया बनीं, वहीं मनोज विश्वास भी अपनी पंचायत में लगातार दो बार पैक्स अध्यक्ष का चुनाव जीते हैं, जो स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। 29 अक्टूबर 2025 को, चुनाव से ठीक पहले, मनोज विश्वास ने आरजेडी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया और उन्हें फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किया गया। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीद और विश्वास को सही साबित करते हुए बीजेपी के गढ़ को भेद दिया। उनकी जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र में 35 साल बाद कांग्रेस की वापसी का प्रतीक भी है, जिससे वह पार्टी के एक महत्वपूर्ण और उभरते हुए नेता बन गए हैं।

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