Home बिहार हिजाब हटाने पर भड़काने वालों को नुसरत परवीन का सादगी भरा सख्त...

हिजाब हटाने पर भड़काने वालों को नुसरत परवीन का सादगी भरा सख्त जवाब

166
0
Nusrat Parveen's simple yet stern reply to those who provoked her for removing her hijab

पटना की एक मासूम सी लड़की डॉक्टर नुसरत परवीन ने हिजाब को लेकर भारी विवाद को जन्म देने वालों को कड़ा संदेश दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉक्टर नुसरत के चेहरे से हिजाब तब हटा दिया था जब वे उसे आयुष डॉक्टर के रूप में संविदा नियुक्ति का पत्र सौंप रहे थे। नीतीश के ऐसा करने के पीछे मंशा साफ थी, वे चाहते थे कि बिहार की यह लड़की, जिसने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है, उसको लोग पहचान सकें। यह कुछ ऐसा ही सहज व्यवहार था जैसा एक पिता अपनी पुत्री से कर सकता है। लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों ने इस सामान्य घटना के संदर्भ को नीतीश पर प्रहार करने का हथियार बना लिया। इसके बाद पटना के हिजाब विवाद को इतना राजनीतिक रंग दिया गया कि यह देश ही नहीं विदेश में भी चर्चा का विषय बन गया। पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद एमडी कर रहीं डॉक्टर नुसरत परवीन को 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आवास पर एक कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र सौंपा था। उनके साथ अन्य डॉक्टरों को भी नियुक्ति पत्र दिए गए थे।

इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुआ। इस वीडियो में दिखा कि नीतीश कुमार डॉक्टर नुसरत को नियुक्ति पत्र सहित अन्य दस्तावेज सौंपते हुए उनको हिजाब हटाने और फोटोग्राफरों की ओर रुख करने का इशारा करते हैं। इससे पहले कि नुसरत हिजाब हटातीं, नीतीश ने खुद ही अपना हाथ बढ़ाकर उनका हिजाब नीचे खींच दिया। इस घटनाक्रम के दौरान नुसरत हतप्रभ जरूर थी लेकिन उनमें नाराजगी नहीं दिखी। यह बहुत सामान्य घटना थी जिसमें न तो किसी को शर्मशार करने की, न ही किसी की धार्मिक परंपराओं को आहत करने की मंशा थी। जिसने भी नीतीश कुमार की बॉडी लैंग्वेज को समझने की कोशिश की होगी, वह उनके पितृत्व मनोभाव को भी आसानी से समझ सका होगा। वैसे भी मुस्लिम धार्मिक परंपरा के मुताबिक महिलाओं को सैद्धांतिक रूप से किसी भी ऐसे पुरुष के सामने हिजाब पहनना जरूरी है जिससे वे शादी कर सकती हैं। उनका पिता, भाई, दादा, चाचा या छोटे बच्चों के सामने हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है। हिजाब हटाने की बात छोटी सी थी, लेकिन इस पर राजनीति बड़ी हुई। चूंकि नीतीश कुमार बिहार की उस एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री हैं, जिसका हिस्सा बीजेपी भी है, तो विपक्षी दल उन पर कुछ ज्यादा ही आक्रामक हो गए।

GNSU Admission Open 2026

कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने नीतीश की आलोचना की। कुछ धार्मिक संगठनों ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। हिजाब विवाद तूल पकड़ता गया और पाकिस्तान में भी इस घटना की निंदा की गई। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी भी इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने डॉक्टर नुसरत को तीन लाख रुपये के वेतन के साथ मनचाहे स्थान पर नियुक्ति देने और सरकारी फ्लैट भी देने का प्रस्ताव दे दिया। इस विवाद के बीच डॉक्टर नुसरत परवीन के किसी रिश्तेदार का बयान आया कि वे बिहार के बजाय पश्चिम बंगाल में नौकरी ज्वाइन करेंगी। हालांकि डॉक्टर नुसरत का हवाला देते हुए उनकी नाराजगी की बातें भी कही गईं, लेकिन इस घटना पर उन्होंने खुद कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी। डॉ नुसरत की नियुक्ति पटना के सदर के प्राइमरी हैल्थ क्लीनिक में की गई थी और उनकी ज्वाइनिंग की तारीख 20 दिसंबर तय की गई थी। वे इस तारीख को ज्वाइन करने के लिए नहीं पहुंचीं। इसके बाद उनकी ज्वाइनिंग की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई। इस अवधि में भी उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। आखिरकार उनकी ज्वाइनिंग के लिए अंतिम समय सीमा 7 जनवरी तय कर दी गई।

अब तक खामोश बनी रहीं डॉक्टर नुसरत इस तारीख को खामोशी के साथ आईं और अपनी पहली नौकरी ज्वाइन कर ली। डॉ नुसरत का हिजाब हटाने की घटना को लेकर चाहे जितना तूल दिया गया हो, लेकिन वे खुद इस पर पूरे समय खामोश बनी रहीं। उनका खामोश रहना और शांति से एक डॉक्टर के रूप में समाज की सेवा के लिए कदम बढ़ाना उन सभी राजनीतिक, धार्मिक सगठनों को करारा जवाब देने वाला है जो वैचारिक संकीर्णताओं के वशीभूत हैं और किसी भी सामान्य घटना में अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश में जुटे रहते हैं। डॉ नुसरत चाहतीं तो झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करके काफी बड़ी पगार पर नौकरी ज्वाइन कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने ऐसा करके डॉक्टर इरफान अंसारी को भी यह संदेश दे दिया कि वे राजनीति का मोहरा नहीं हैं, बल्कि एक पीड़ित मरीजों की सेवा करने वाली समर्पित डॉक्टर हैं और इस सेवाभाव के लिए कोई बोली नहीं लगा सकता है।

GNSU Admission Open 2026