पटना: जी हां ,राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुत्र निशांत कुमार की लॉन्चिंग की तैयारी करें न करें, पर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि बीजेपी के रणनीतिकारों ने निशांत कुमार की लॉन्चिंग की तैयारी कर ली है। इस लॉन्चिंग के पीछे बीजेपी भविष्य की राजनीति के दो पेंच सुलझाने का प्लान कर रही है। क्या है बीजेपी रणनीतिकारों का प्लान और क्यों, समझिए यहां। बिहार के जातीय समीकरण में गठबंधन की राजनीति का असर बीजेपी के रणनीतिकार देख चुके हैं। होता यह आया है कि पिछले 20 सालों में यही देखा गया है कि जीत उसी की होती है जिधर नीतीश कुमार यानी जनता दल यू रहता है। विधानसभा चुनाव 2015 में नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ गए तो सरकार महागठबंधन की बनी। बीजेपी को सीटों का भी नुकसान हुआ। बीजेपी तब 157 सीटों पर लड़ी और 53 सीटों पर विजय हासिल की। वहीं जब 2010 में जदयू के साथ लड़ी तो 102 पर बीजेपी के उम्मीदवार लड़े और 91 जीते। 2020 में भी जदयू साथ थी को आज की तारीख में बीजेपी का 80 सीटों पर कब्जा है।
लिहाजा बीजेपी इतना जान चुकी है कि जीत का समीकरण बनाने के लिए नीतीश जरूरी हैंस इसीलिए अतिपिछड़ों का वोट NDA को मिलता है। खास तौर पर कुर्मी, धानुक और कुशवाहा वोटर नीतीश के साथ हैं। बीजेपी इन्हीं समीकरणों पर मान बैठी है कि एनडीए फिर से सत्ता पा लेगी। यानी 2025 फिर से नीतीश का युग होने जा रहा है। बीजेपी के रणनीतिकारों की माने तो उनके शीर्ष नेता को उस सर्वे का भरोसा है जिसे अमित शाह के निर्देश पर पूरा किया गया था। यह सर्वे वर्तमान में नीतीश कुमार के बदले-बदले व्यवहार और स्वास्थ्य संबंधी लगे आरोपों के बाद कराया गया था। इस सर्वे के बाद यही पता चला कि नीतीश कुमार के वोटर अधिकांशतः उन पर अभी भी भरोसा करते हैं। यही वजह भी रही एक समय नीतीश कुमार के नेतृत्व पर चुप्पी साध लेने वाले बीजेपी नेता मुखर हुए। और फिर तो अमित शाह ने भी नीतीश कुमार के लिए खिड़की, दरवाजा सब खोल दिया और यह यह बार-बार अपने संबोधन में यह कहने लगे कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
बीजेपी सूत्रों की माने तो प्लान A ये है कि बड़ी ही खुशमिजाजी के साथ इस बार भी एनडीए गठबंधन की सरकार का नेतृत्व नीतीश कुमार के हाथ में हो। उनके ही निर्देश और पसंद के साथ मंत्रिमंडल विस्तार हो। प्लान B यह है कि कुछ महीने तक जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार सरपट दौड़ने लगे तो बीजेपी के ही शीर्ष नेता नीतीश कुमार के पास निशांत कुमार की लॉन्चिंग प्रोग्राम को ले कर जाएंगे। यह प्रोग्राम है तेजस्वी यादव की तरह ही निशांत कुमार को बतौर डिप्टी सीएम के रूप में प्रोजेक्ट करना। पर इस प्लान की सफलता नीतीश कुमार के हाथ होगी। अगर वो इसे स्वीकार कर लेते हैं तो वो खुद और बेटे निशांत एक मंत्रिमंडल में नहीं रहेंगे।
क्योंकि वो परिवारवाद के कट्टर विरोधी रहे हैं। ऐसे में वो सीएम पद को त्याग देंगे। एक समय तो यह था जब बीजेपी ने नीतीश कुमार के वोट बैंक पर कब्जे के लिए पार्टी के भीतर कई नेताओं को जगह दी। उनमें शंभू पटेल, भीम सिंह को राज्यसभा और अनामिका पटेल को एमएलसी भी बनाया। बीजेपी को तब लगता था कि नीतीश कुमार के बाद जदयू बिखर जाएगी। इसलिए पार्टी के भीतर ही कुर्मी, कुशवाहा नेतृत्व को विकसित कर दिया जाए। लेकिन अब बीजेपी दूसरी धारा पर काम कर रही है। बीजेपी के रणनीतिकार निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री बना कर जनता दल यू को भी बतौर पार्टी खड़ी रखना चाहती है। बीजेपी का मानना है कि राजनीति में जब निशांत कुमार का प्रवेश हो जाएगा तो पार्टी भी चला लेंगे। पर बीजेपी के इस प्लान की निर्भरता अब सीएम नीतीश कुमार के हाथ में है।







